इंफाल, 18 अगस्त (भाषा) मणिपुर के कुकी विधायकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूर्वोत्तर राज्य के कुकी बहुल पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग मुख्य सचिव और अलग पुलिस महानिदेशक की व्यवस्था करने का अनुरोध किए जाने के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को स्वतंत्र होकर बोलने का अधिकार है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सात विधायकों सहित दस कुकी विधायकों ने बुधवार को मोदी से एक ज्ञापन में अनुरोध किया कि तीन महीने से जारी जातीय हिंसा के मद्देनजर राज्य के पांच पर्वतीय जिलों में ‘कुशल प्रशासन’ सुनिश्चित करने के वास्ते ‘मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के समकक्ष पद’ स्थापित किए जाएं।
जिन पांच जिलों के लिए मांग उठाई गई है, उनमें चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, टेंग्नौपाल और फेरज़ावल शामिल हैं।
सद्भावना दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘लोकतंत्र में हर किसी को स्वतंत्र रूप से बोलने का अधिकार है।’
हालांकि समारोह में कई विधायक मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी इस मुद्दे पर मीडिया से बात नहीं की।
कुकी विधायकों ने अपने ज्ञापन में दावा किया, ‘कुकी-ज़ो जनजातियों से संबंधित आईएएस, एमसीएस, आईपीएस और एमपीएस अधिकारी काम करने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ रहे हैं…।’
कुकी-ज़ो विधायकों ने राज्य में तीन महीने से जारी जातीय संघर्ष के कारण अपने घर और आजीविका खो चुके समुदाय के लोगों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 500 करोड़ रुपये की मांग भी की है।
इससे पहले 10 विधायकों ने प्रधानमंत्री मोदी से मणिपुर के जनजातीय इलाकों के लिए अलग प्रशासन बनाने का आग्रह किया था।
भाषा नेत्रपाल नरेश
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