नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शुक्रवार को कहा कि असहमति और अभिव्यक्ति की आजादी भारतीय संसदीय व्यवस्था की ताकत हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार के लिए नहीं होना चाहिए।
वह ‘सांविधानिक तथा संसदीय अध्ययन संस्थान’ द्वारा विधायी मसौदा तैयार करने के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के समापन सत्र में बोल रहे थे।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नकवी ने कहा, ‘‘भारत दुनिया का अकेला, अनोखा और अग्रणी लोकतंत्र है जहां लगभग 900 से ज्यादा भाषाएं, दुनिया के सभी धर्मावलंबी, 100 से ज्यादा खान-पान संबंधी आदतें, करोड़ों किसी भी धर्म को ना मानने वाले, 65 से ज्यादा संस्कृतियां, 45 से ज्यादा परंपरागत वेशभूषा आदि वाली आबादी के बावजूद ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ हमारी ताकत है।’’
उनका कहना था कि आज भारतीय संसदीय व्यवस्था, हमारा जीवंत लोकतंत्र पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श है।
नकवी ने कहा, ‘‘आलोचना, असहमति, अभिव्यक्ति की आजादी, भारतीय संसदीय व्यवस्था की ताकत हैं लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि इस ताकत का दुरुपयोग संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों, मर्यादाओं पर प्रहार के लिए ना हो।
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