भुवनेश्वर, छह जुलाई (भाषा) आयकर विभाग के अधिकारियों ने कर चोरी के संबंध में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन ओडिशा की रियल एस्टेट कंपनी डीएन समूह के 20 ठिकानों पर छापेमारी की।
कंपनी और आयकर विभाग दोनों ही इस घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी कंपनी के निदेशक, कर्मचारियों के आवास और शहर में आईआरसी विलेज स्थित उसके कार्यालय पर हुई। सूत्रों ने कहा कि यूनिट-4 में एक कर्मचारी के घर से कथित तौर पर करीब नौ करोड़़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को डीएन समूह के एक कर्मचारी को आगे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। उन्होंने कहा कि इस कर्मचारी के पास से नकदी बरामद की गई है। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग के दल ने छापेमारी के दौरान कंपनी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आयकर अधिकारी कंपनी द्वारा करीब 105 करोड़ रुपये के हेर-फेर की जांच कर रहे हैं।
डीएन समूह के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”हमें आयकर विभाग द्वारा की गई जब्ती से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है। कंपनी छापेमारी के खत्म होने तक किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं देगी।”
डीएन समूह कई आवासीय परियोजनाओं, मॉल, आतिथ्य और अन्य क्षेत्र में काम करती है।
इस बीच आयकर छापेमारी को लेकर राजनीतिक खींचतान भी शुरू हो गई है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) पर निशाना साधा है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में डीएन समूह के अध्यक्ष जे पी नायक मुख्यमंत्री के जापान दौरे पर उनके साथ गए थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक एस एस सलूजा ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के कई सारे नेताओं ने डीएन समूह में निवेश किया हुआ है, जिसकी वजह से कंपनी को संरक्षण मिल रहा है। सलूजा ने कहा कि यह जानना जनता का अधिकार है कि डीएन समूह में किस-किसने निवेश किया हुआ है।
भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने डीएन समूह को मुख्यमंत्री कार्यालय का संरक्षण प्राप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी प्रमुख वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकों में भाग ले रहे थे।
हालांकि, बीजद के एक विधायक ने विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ”हमारा डीएन समूह से कोई लेना-देना नहीं है। कानून को उसका काम करने दीजिए। विपक्ष को इस तरह के मामले में मुख्यमंत्री को नहीं लाना चाहिए।”
भाषा जितेंद्र वैभव
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