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Wednesday, 1 April, 2026
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आईएमए, केजीएमओए ने ऑपरेशन थिएटर में लंबी आस्तीन की जैकेट पहनने की महिला डॉक्टरों की मांग खारिज की

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तिरुवनंतपुरम, जून 29 (भाषा) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सहित कई चिकित्सीय संगठनों ने ऑपरेशन थिएटर में लंबी आस्तीन वाली जैकेट और ‘सर्जिकल हुड’ पहनने की मुस्लिम एमबीबीएस छात्राओं के एक समूह की मांग पर बृहस्पतिवार को कड़ी आपत्ति जताई।

आईएमए ने कहा कि अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति मरीज होता है और उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य मौजूद ‘प्रोटोकॉल’ का पालन किया जाना चाहिए।

केरल गर्वमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (केजीएमओए) ने भी इसी प्रकार के विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के अनुरोध को मंजूरी देना वैज्ञानिक और नैतिक रूप से गलत होगा।

आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. सुल्फी नोहू ने कहा कि एसोसिएशन मौजूदा दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही चलना चाहता है।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनियाभर के अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर में मरीज को सबसे महत्वपू्र्ण माना जाता है। मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जगहों पर अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है ताकि उन्हें संक्रमित होने से बचाया जा सके।’’

केजीएमओए के अध्यक्ष डॉ. सुरेश टीएन का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक तंत्र होता है और वैज्ञानिक पहलू के लिहाज से उस प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।

संक्रमण को दूर रखने की प्रक्रिया के तहत बार-बार हाथ धोने चाहिए और थिएटर में हमेशा दस्ताने पहनने चाहिए।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इस तरह के हालात में, लंबी आस्तीन वाली जैकेट, जैसा छात्राएं मांग कर रही हैं, मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर मंजूर नहीं की जा सकती हैं। ये वैज्ञानिक और नैतिक रूप से सही नहीं है।’’

यहां के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं मुस्लिम छात्राओं के एक समूह ने ऑपरेशन थिएटर के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दिए जाने पर चिंता व्यक्त की थी और जल्द से जल्द, लंबी आस्तीन वाली ‘स्क्रब जैकेट’ और ‘सर्जिकल हुड’ पहनने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी।

वर्ष 2020 बैच की एक छात्रा ने इस मुद्दे पर 26 जून को प्राचार्य डॉ. लिनेट जे मॉरिस को एक पत्र लिखा था। अनुरोध पत्र पर कॉलेज के विभिन्न बैच की छह अन्य मेडिकल छात्राओं के भी हस्ताक्षर हैं।

पत्र में, छात्राओं ने शिकायत की थी कि उन्हें ऑपरेशन थिएटर के अंदर सिर ढकने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी धार्मिक मान्यता के अनुसार, मुस्लिम महिलाओं के लिए हर परिस्थिति में हिजाब पहनना अनिवार्य है।’’

छात्राओं ने कहा, ‘‘लंबी आस्तीन वाली जैकेट और सर्जिकल हुड उपलब्ध हैं, जिससे हम अपने हिजाब के साथ-साथ एहतियात भी बरत सकते हैं।’’

छात्राओं ने कहा कि वह चाहती हैं कि प्राचार्य इस मामले पर गौर करें और उन्हें जल्द से जल्द ऑपरेशन थिएटर में इसे पहनने की अनुमति दें।

पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए मॉरिस ने कहा कि उन्होंने छात्रों को ऑपरेशन थिएटर के अंदर निर्धारित एहतियाती तौर-तरीकों का पालन करने और विश्व स्तर पर स्वीकृत मौजूदा ‘ड्रेस कोड’ का पालन करने की आवश्यकता के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर में रोगाणु-कीटाणु के संक्रमण की आशंका रहती है और वहां मरीजों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्राचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम ऑपरेशन थिएटर के अंदर मौजूदा प्रक्रियाओं और तौर-तरीकों को दरकिनार नहीं कर सकते। मैंने उन्हें इससे जुड़ी सभी तरह की परेशानी के बारे में बताया।”

मॉरिस ने कहा कि छात्राओं की परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर गौर करने के लिए कुछ सर्जन की एक समिति गठित करेंगी।

भाषा जितेंद्र जितेंद्र अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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