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Monday, 20 April, 2026
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जूनागढ़ पिटाई मामला:गुजरात उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

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अहमदाबाद, 28 जून (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने जूनागढ़ शहर में पथराव की एक घटना के बाद मुस्लिम पुरुषों के एक समूह को कथित तौर पर ‘बेल्ट’ से पीटने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.जे. देसाई और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने राज्य सरकार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों से 17 जुलाई तक जवाब मांगा है। अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए सोमवार को स्वीकार किया था।

याचिका में दावा किया गया है कि पथराव में कुछ पुलिस कर्मियों के घायल होने के बाद, पुलिस ने ‘बदला लेने के लिए’ अल्पसंख्यक समुदाय के आठ से 10 लोगों की सार्वजनिक रूप से बेल्ट से पिटाई की और उनके घरों में तोड़फोड़ की। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था।

यह याचिका गैर सरकारी संगठन लोक अधिकार संघ और अल्पसंख्यक समन्वय समिति ने दायर की है।

याचिका में राज्य सरकार के अलावा गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक को प्रतिवादी बनाया गया है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के जूनागढ़ शहर में 16 जून की रात नगर निकाय द्वारा एक दरगाह को ध्वस्त करने का नोटिस दिए जाने के बाद झड़प हुई थी।

पुलिस के अनुसार, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा किए गए पथराव में एक व्यक्ति की मौत हो गई। समुदाय के लोग दरगाह को ध्वस्त किये जाने का विरोध कर रहे थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद, पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के आठ से 10 लोगों को हिरासत में लिया, उन्हें मजेवाडी गेट इलाके में गेबन शाह मस्जिद के सामने कतार में खड़ा किया और बेल्ट से उपकी पिटाई की।

याचिका में कहा गया है कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, ये लोग उस पथराव में शामिल भीड़ का हिस्सा थे, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक सहित कुछ पुलिस कर्मी घायल हो गए थे।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह जानकारी दी कि ये लोग अब भी जेल में हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि याचिका में दंगाइयों द्वारा किये गये दंगे, पथराव या किसी भी प्रकार की हिंसा को उचित करार देने का अनुरोध नहीं किया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि दंगों के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जूनागढ़ पुलिस उनके घरों में पहुंची और कथित पथराव और कुछ पुलिस कर्मियों को लगी चोटों का “बदला लेने के लिए” वहां तोड़फोड़ की।

याचिका में दलील दी गई है कि सार्वजनिक रूप से बेल्ट से पिटाई करना गैरकानूनी है और भारत के संविधान के समानता, स्वतंत्रता, जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित अनुच्छेद क्रमश: 14, 19 और 21 का हनन करता है और अदालती कार्यवाही की अवमानना ​​है।

भाषा प्रशांत सुभाष

सुभाष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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