नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) ट्विटर के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जैक डोर्सी ने दावा किया है कि भारत सरकार ने देश में किसानों के प्रदर्शन के दौरान खातों और पोस्ट पर रोक लगाने के आदेश का पालन नहीं होने पर ट्विटर को बंद करने की चेतावनी दी थी। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस आरोप को ‘साफ झूठ’ बताकर खारिज कर दिया है।
डोर्सी ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि भारत सरकार ने 2020 और 2021 में केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन पर सरकार की आलोचना वाले खातों और पोस्ट को हटाने का अनुरोध नहीं मानने पर कंपनी का कामकाज बंद करने और उसके कर्मचारियों पर छापे मारने की धमकियों के साथ दबाव बनाया था।
ट्विटर के सीईओ के पद से डोर्सी ने 2021 में इस्तीफा दे दिया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री चंद्रशेखर ने डोर्सी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए ट्वीट किया कि ‘‘डोर्सी के समय ट्विटर प्रशासन को भारतीय कानून की संप्रभुता को स्वीकार करने में दिक्कत होती थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोई जेल नहीं गया और ना ही ट्विटर बंद किया गया। यह जैक का साफ झूठ है जो शायद ट्विटर के इतिहास के उस, बहुत संदिग्ध समय के दागों को मिटाने की कोशिश है।’’
चंद्रशेखर ने अपने लंबे पोस्ट में इस बारे में विस्तार से लिखा है कि सरकार ने ऐसा क्या देखा जो सोशल मीडिया मंचों को संचालित करने वाले स्थानीय कानूनों का पालन नहीं होने जैसा था।
उन्होंने कहा, ‘‘तथ्य और सत्य- डोर्सी और उनकी टीम के समय ट्विटर लगातार और बार-बार भारतीय कानून का उल्लंघन कर रहा था। उन्होंने 2020 से 2022 तक बार-बार कानूनों की अवमानना की और अंतत: जून 2022 में उन्होंने अनुपालन शुरू किया।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डोर्सी के समय ट्विटर को भारतीय कानून की संप्रभुता को स्वीकार करने में समस्या थी और वह ऐसे व्यवहार करता था मानो भारत के कानून उस पर लागू नहीं होते।
विपक्षी दलों ने डोर्सी के दावों के हवाले से सरकार को घेरने का प्रयास किया।
कांग्रेस ने कहा कि डोर्सी के इस दावे से एक बार फिर प्रमाणित हो गया है कि मौजूदा सरकार देश के लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘जब हमारे किसान अपने हक के लिए दिल्ली की सीमाओं पर बैठे थे। जब वे सर्दी, गर्मी, बरसात झेलते हुए अपने प्राण त्याग रहे थे। तब एक तानाशाह उनकी खबर को दबाने में लगा था।’
राज्यसभा सदस्य और शिवसेना-यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने चंद्रशेखर के ट्वीट के जवाब में लिखा कि जिस कानून को ट्विटर ने तोड़ा, वह नफरत भरे भाषण और भाजपा के एजेंडे को बढ़ाने के लिए था।
चंद्रशेखर ने कहा ‘‘एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत के पास यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि उसके कानूनों का भारत में संचालित सभी कंपनियां पालन करें।’’
चंद्रशेखर ने कहा कि जनवरी 2021 में प्रदर्शनों के दौरान अनेक दुष्प्रचार किये गये और यहां तक कि नरसंहार की खबरें थीं जो कि निश्चित रूप से फर्जी थीं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मंच से गलत सूचनाओं को हटाने के लिए बाध्य थी क्योंकि फर्जी खबरों के आधार पर हालात और बिगड़ने की आशंका थी।
उन्होंने ट्विटर पर गलत सूचनाएं फैलाने वाले ट्वीट हटाने के अनुरोधों को नहीं मानने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘जैक के समय ट्विटर पर पक्षपातपूर्ण रवैये का यह स्तर था कि उन्हें भारत में इस मंच से गलत सूचनाओं को हटाने में दिक्कत थी, जबकि अमेरिका में अनेक घटनाओं में उन्होंने खुद ऐसा किया।’’
चंद्रशेखर ने कहा कि किसी के यहां छापे नहीं मारे गये और ना ही किसी को जेल भेजा गया तथा पूरी तरह ध्यान भारतीय कानूनों के अनुपालन पर था।
उन्होंने कहा, ‘‘जैक के समय ट्विटर के मनमाने, खुल्लम खुल्ला पक्षपातपूर्ण और भेदभाव वाले रवैये के तथा उस अवधि में इसके मंच पर उनके अधिकारों के दुरुपयोग के अनेक प्रमाण हैं जो अब सार्वजनिक हैं।’’
साल 2021 में ट्विटर के सीईओ पद से इस्तीफा दे चुके डोर्सी ने सोमवार को यूट्यूब के समाचार शो ‘ब्रेकिंग प्वाइंट्स’ को दिये साक्षात्कार में ये आरोप लगाये।
उन्होंने ट्विटर पर दबाव बनाये जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘यह कई तरीकों से किया गया, जैसे :‘हम भारत में ट्विटर को बंद कर देंगे’, जो हमारे लिए बहुत बड़ा बाजार है। ‘हम आपके कर्मचारियों के घरों पर छापे मारेंगे’, जो उन्होंने किया। और यह भारत है, एक लोकतांत्रिक देश।’’
भारत सरकार ऑनलाइन सेंसरशिप की बात से बार-बार इनकार करती रही है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, ‘‘डोर्सी और उनकी टीम के समय ट्विटर भारतीय कानून का बार-बार और लगातार उल्लंघन कर रहा था, ऐसा सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने कहा है। हां, जो कानून उन्होंने तोड़ा वह नफरत भरे भाषण देने और भाजपा के कट्टर एजेंडा के लिए था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि यह उनके एजेंडा का समर्थन कर रहा था। जिस क्षण लोगों और विपक्ष ने मंच का इस्तेमाल करते हुए चुनौती देना शुरू कर दिया, उसी समय सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी।’’
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा
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