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Friday, 1 May, 2026
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मप्र उच्च न्यायालय ने पेड़ों को सजीव प्राणी का दर्जा दिए जाने संबंधी याचिका पर सरकार से जवाब मांगा

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इंदौर, 25 अप्रैल (भाषा) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने पेड़ों को सजीव प्राणी का कानूनी दर्जा और अधिकार दिए जाने का आग्रह करने वाली जनहित याचिका पर सरकार को मंगलवार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अमन शर्मा ने यह याचिका शहर के दो अलग-अलग स्थानों पर फ्लाईओवर बनाने के लिए 1,800 से ज्यादा पेड़ों के वजूद पर कथित संकट को लेकर चिंता जताते हुए दायर की है।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति प्रकाशचंद्र गुप्ता ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी किया। याचिका पर 10 मई को अगली सुनवाई संभावित है।

याचिकाकर्ता के वकील अभिनव धनोदकर ने पीटीआई-भाषा को बताया कि उनके मुवक्किल ने शहर के खजराना चौराहा और फूटी कोठी चौराहा पर दो अलग-अलग फ्लाईओवर बनाने के लिए कुल 1,800 से ज्यादा पेड़ों के कटने या स्थानांतरित होने के कथित संकट की ओर उच्च न्यायालय का ध्यान खींचा है।

धनोदकर ने बताया कि याचिका में मशहूर भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस के उस प्रयोग का भी हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने साबित किया था कि अन्य प्राणियों की तरह पेड़-पौधों में भी जान होती है।

उन्होंने बताया कि याचिका में उच्च न्यायालय से गुहार की गई है कि पेड़-पौधों को सजीव प्राणी का कानूनी दर्जा तथा अधिकार प्रदान किए जाएं और पेड़ काटने पर रोक लगाने की नीति बनाने के लिए सरकार को निर्देशित किया जाए।

धनोदकर ने कहा कि उच्च न्यायालय से यह अनुरोध भी किया गया है कि विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए और शहर में काटे जा रहे पेड़ों को लेकर इस समिति से रिपोर्ट तलब की जाए।

भाषा हर्ष नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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