नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सिनेमेटोग्राफी विधेयक 2023 को मंजूरी प्रदान की, जिसमें ‘पायरेसी’ के जरिये फिल्मों को इंटरनेट पर प्रसारित किये जाने से रोकने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी दी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
उन्होंने बताया कि संसद के अगले सत्र में सिनेमेटोग्राफी विधेयक 2023 को पेश किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया गया था और उसे संसद की स्थायी समिति को भेजा गया था। स्थायी समिति ने इस पर सुझाव दिये थे।
ठाकुर ने कहा कि इस बारे में सभी पक्षकारों के साथ चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि फिल्मों में साहित्यिक/सामग्री की चोरी या पायरेसी से नुकसान नहीं हो, इसलिए यह विधेयक तैयार किया गया है। इससे पूरे फिल्म जगत को लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि विधेयक में फिल्मों को वर्तमान ‘यू’, ‘ए’ और ‘यूए’ की व्यवस्था की बजाए आयु वर्ग के हिसाब से वर्गीकरण करने का प्रावधान किया गया है।
ज्ञात हो कि ‘यू’ प्रमाणन बिना रोक के सार्वजनिक प्रदर्शन करने से संबंधित है, जबकि ‘ए’ प्रमाणन वयस्क आयु वर्ग के दर्शकों के लिए, ‘यूए’ प्रमाणन अभिभावकों की निगरानी में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए तथा ‘एस’ प्रमाणन चिकित्सकों, वैज्ञानिकों जैसे विशेष श्रेणी के दर्शकों के लिए है।
समझा जाता है कि संशोधन में 12 वर्ष के स्थान पर ‘यूए-7+’, ‘यूए-13+’ और ‘यूए-16+’ वर्गीकरण करने का प्रस्ताव किया गया है।
पिछले सप्ताह सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा ने मुम्बई में एक समारोह में कहा था कि इस विधेयक में इंटरनेट पर फिल्मों की सामग्री के प्रसारण से जुड़े प्रावधानों को जोड़ा जा रहा है।
भाषा दीपक दीपक सुभाष
सुभाष
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