कोलकाता, 13 अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताओं की जांच कर रहे ईडी और सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ उसकी अनुमति के बिना कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।
मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी कुंतल घोष ने हाल में आरोप लगाया था कि जांचकर्ता उस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम लेने का दबाव बना रहे हैं। इसका परोक्ष उल्लेख तृणमूल कांग्रेस के नेता द्वारा एक सार्वजनिक भाषण में किया गया था जिसे उच्च न्यायालय ने संज्ञान में लिया।
भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के जांच अधिकारियों के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि घोष की ओर से निचली अदालत को भेजा गया वह पत्र उन्हें प्रभावित करने का आरोपी का एक प्रयास है, जिस पर भर्ती घोटाले में कथित तौर पर एक एजेंट की भूमिका निभाने का आरोप है। उन्होंने कहा कि घोष ने उक्त पत्र में लिखा है कि जांचकर्ता उस पर टीएमसी नेता का नाम लेने का दबाव बना रहे हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास भट्टाचार्य ने अदालत से अपील की पत्र की फोरेंसिक जांच का आदेश दिया जाना चाहिए।
ईडी की ओर से पेश वकील सम्राट गोस्वामी ने कहा कि 21 जनवरी को एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया घोष निचली अदालत के आदेश पर उसकी 14 दिन की हिरासत में है।
ईडी की हिरासत खत्म होने के बाद वह न्यायिक हिरासत में है।
न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने पत्र के संबंध में ईडी और सीबीआई को 20 अप्रैल तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
शाम को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, टीएमसी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का एक वर्ग “कानून के अनुसार व्यवहार नहीं कर रहा है।”
उन्होंने कहा, “न्यायपालिका के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। एक पार्टी के तौर पर टीएमसी भी न्यायपालिका का काफी सम्मान करती है। लेकिन, दुर्भाग्य से कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायपालिका का एक वर्ग कानून के अनुसार व्यवहार नहीं कर रहा है।”
घोष के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि टीएमसी का गुस्सा काफी स्वाभाविक है क्योंकि “भेद खुल गया है”।
उन्होंने कहा, “ टीएमसी के कई नेताओं को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया जा रहा है। और, जो भी टीएमसी के भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता है, वह गलत हो जाता है, चाहे वह राज्यपाल हो या न्यायपालिका। यह साबित करता है कि उनके मन में न्यायपालिका के लिए कोई सम्मान नहीं है।”
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