नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अवैध आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी।
न्यायालय ने इसे जीवन के अधिकार को प्रभावित करने वाला ‘‘खतरा’’ बताया।
न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की एक पीठ अदालत द्वारा दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से वर्षों से शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज मामलों से संबंधित आंकड़ा प्रस्तुत करने को कहा।
इसने गृह मंत्रालय से एक हलफनामा दायर करने को कहा जिसमें शस्त्र अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए उठाए गए कदमों और कानून प्रवर्तन को मजबूत करने के सुझावों का संकेत दिया गया हो।
पीठ ने कहा, ‘‘यह मामला गंभीर है क्योंकि यह जीवन के अधिकार को प्रभावित करता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बिना लाइसेंस के आग्नेयास्त्रों के खतरे से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। इन दोनों पहलुओं पर सभी डीजीपी अलग-अलग हलफनामा दाखिल करें।’’
पीठ ने मामले को तीन सप्ताह के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
भाषा देवेंद्र अमित
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