कोच्चि, 13 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता और पूर्व विधायक के.एम. शाजी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को खारिज कर दिया।
शाजी पर राज्य के कन्नूर जिले के एझिकोड क्षेत्र में एक उच्च माध्यमिक विद्यालय में 12वीं के पाठ्यक्रम को मंजूरी देने के लिए 25 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने कहा कि शाजी के खिलाफ शिकायत में या प्राथमिकी में या किसी भी गवाह के बयान में ऐसा कोई आरोप नहीं था कि उन्होंने कभी रिश्वत की मांग की थी।
अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत एक लोकसेवक के खिलाफ रिश्वत का अपराध तब बनता है जब रिश्वत की मांग भी की गई हो न कि सिर्फ उसे स्वीकार करने से।
उच्च न्यायालय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों में भी कहा गया है कि किसी लोक सेवक द्वारा कथित रूप से रिश्वत के रूप में किसी रकम को स्वीकार करना भर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत रिश्वत के आरोपों को पुष्ट करने के लिये पर्याप्त नहीं है जब तक कि रिश्तव की मांग न की गई हो।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि शाजी ने कभी किसी आधिकारिक कार्य को करने के लिए किसी से रिश्वत की मांग की हो।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इसलिए प्रथामिकी में ऐसे किसी आरोप के अभाव या जांच के दौरान आईयूएमएल नेता द्वारा घूस की मांग किए जाने संबंधी कोई अन्य सामग्री न मिलने की स्थिति में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत लोकसेवक द्वारा रिश्वत लिए जाने का आरोप “स्थापित नहीं होता” है।
न्यायमूर्ति एडप्पागथ ने कहा कि ऐसे में प्राथमिकी खारिज की जाती है।
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प्रशांत नरेश
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