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Wednesday, 22 April, 2026
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आंध्र प्रदेश सीआईडी ने किया ईडी और आयकर विभाग से मार्गदर्शी चिटफंड मामले की जांच का अनुरोध

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नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) आंध्र प्रदेश सीआईडी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों से मीडिया जगत के प्रमुख उद्यमी रामोजी राव द्वारा स्थापित मार्गदर्शी चिटफंड कंपनी की जांच करने का अनुरोध किया है जिस पर चिटफंड कानून का उल्लंघन कर कंपनी की नकदी जमा रिकॉर्ड से ‘छेड़छाड़ करने व गलत जानकारी’ देने का आरोप है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अपर पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) एन. संजय ने संवाददाताओं को बताया कि मार्गदर्शी चिटफंड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने कथित तौर पर ‘भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना’ नकदी जमा की और निवेशकों से जमा कराई गई राशि को स्थानांतरित कर ‘जोखिम भरे स्टॉक बाजार’ में लगाया। उन्होंने बताया कि इस कंपनी के मालिक तेलुगु समाचार समूह ‘इनाडु’ के अध्यक्ष रामोजी राव हैं।

हालांकि, कंपनी के अधिकारियों ने किसी गलत कार्य में संलिप्त होने से इनकार किया है। अधिकारियों ने दावा किया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई इसलिए की जा रही है क्योंकि राज्य सरकार मानती है कि उसका (इनाडु) का कवरेज ‘पक्षपातपूर्ण’ है।

संजय ने कहा कि सीआईडी को संदेह है कि चिटफंड कंपनी में निवेश करने वाले ‘‘आम लोग या काल्पनिक’हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि मामले में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई गई है लेकिन नियमों के उल्लंघन के मामले में राज्य सरकार ‘मूकदर्शक’ नहीं रह सकती है।

अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के प्रमुख ने आरोप लगया कि चिट फंड कंपनी ने अपना लेखा जोखा चिटफंड अधिनियम 1982 के तहत न जमा कराकर कंपनी अधिनियम के तहत जमा कराया और राज्य सीआईडी का मानना है कि यह अनियमितता है क्योंकि सार्वजनिक धन की देखरेख निजी संस्था द्वारा की जा रही थी।

एडीजी ने बताया कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) को मामले की जांच के लिए लिखा है।

संजय ने बताया कि सीआईडी ने मामले में कंपनी के खिलाफ सात प्राथमिकी दर्ज की है और रामोजी राव व उनकी बहू शैलजा किरण सहित पांच लोगों को बतौर आरोपी नामजद किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी पांचों आरोपियों से पूछताछ की गई है।

आंध्र प्रदेश सीआईडी ने बताया कि उसने कंपनी, उसके प्रवर्तकों और प्रबंधकों के खिलाफ राज्य के स्टांप और पंजीकरण आयुक्त और महानिरीक्षक की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया जिसमें मार्गदर्शी समूह द्वारा ‘नियमों का उल्लंघन’ करने का आरोप लगाया गया था।

संजय ने बताया कि राज्य की 17 चिटफंड कंपनियां सीआईडी जांच के दायरे में हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1961 में स्थापित मार्गदर्शी कपंनी की आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में कुल 108 शाखाएं हैं और वित्तवर्ष 2021-22 के दौरान केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही उसका कुल कारोबार 9,677 करोड़ रुपये का था।

सीआईडी प्रमुख ने संवाददाताओं को बताया कि जब कंपनी के लेखापरीक्षक से चेक से किए गए भुगतान के बारे में पूछा गया तो वह जांचकर्ताओं को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और जानकारी मिली कि आंकड़ों में छेड़छाड़ की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘ क्या हो रहा है इसको लेकर लेखापरीक्षक का लचर रवैया था…उक्त कृत्य का स्पष्ट उत्तर नहीं था कि चिटफंड अधिनियम (1982) का अनुपालन क्यों नहीं किया जा रहा है।’’

उन्होंने बताया कि चिटफंड कंपनी द्वारा एकत्र राशि को ‘‘जोखिम वाले स्टॉक बाजार में लगा दिया गया।’’ संजय ने बताया कि हमने ईडी, आयकर विभाग और एसएफआईओ को मामले की जानकारी के लिए लिखा है और अधिकारियों से मुलाकात की है ताकि वे भी इस प्रकरण की अपने संबंधित कानूनों के तहत जांच कर सकें।

संजय से जब पूछा गया कि क्या जमाकर्ताओं ने राशि के नुकसान की कोई शिकायत की है तो उनका जवाब ‘न’ था। हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘मूकदर्शक’ बनी नहीं रह सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे क्या जनता के सरकार को व्यथा सुनाने तक इंतजार करना चाहिए कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है? सरकार पूरी तरह से नुकसान होने तक इंतजार नहीं कर सकती।’’ सीआईडी प्रमुख ने कहा कि मार्गदर्शी कंपनी ने ‘आर्थिक अपराध’ किया है।

इस बीच, कंपनी के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि सीआईडी की कार्रवाई मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी नीत सरकार के इशारे पर की जा रही है जो ‘लगातार रामोजी समूह पर हमला कर रही है क्योंकि मुख्यमंत्री मानते हैं कि इनाडु ‘पक्षपातपूर्ण’ तरीके से खबरें कवर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि किसी वास्तविक निवेशक ने समूह के खिलाफ शिकायत नहीं की है, जो गत छह दशक से काम कर रहा है।

कंपनी के अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार गलत तरीके से उनके खिलाफ आंध्र प्रदेश जमाकर्ता सुरक्षा एवं वित्तीय संस्थान अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रही है जो उन पर लागू ही नहीं होता।

उन्होंने कहा कि चिटफंड अधिनियम 1982 ‘स्व नियामक प्रणाली’ की सुविधा देता है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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