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Wednesday, 22 April, 2026
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आईपीसीडब्ल्यू मामला: दिल्ली विश्वविद्यालय की समिति पहली रिपोर्ट देने की समयसीमा से चूकी

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नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) महिला आईपी कॉलेज में उत्पीड़न की घटना की जांच के लिए गठित दिल्ली विश्वविद्यालय की एक समिति अपनी पहली रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा से चूक गई है और अभी तक उन छात्राओं से नहीं मिली है जो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही हैं।

समिति का गठन तीन अप्रैल को किया गया था और उसे एक सप्ताह के भीतर अपनी पहली रिपोर्ट देनी थी।

साउथ कैंपस के निदेशक प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में, समिति ने अपने गठन के बाद से केवल एक बैठक की है और विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार यह दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को बैठक करेगी।

समिति के सदस्यों ने अभी तक उन छात्राओं के साथ बैठक नहीं की है या उनसे बात नहीं की है जिन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और कॉलेज की ओर से जवाबदेही की मांग को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि अभी तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं की गई है। समिति के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने पिछले सप्ताह एक बैठक की थी। हम कल दूसरी बैठक कर रहे हैं। हमने प्राचार्य (पूनम कुमरिया) वार्डन और यूनियन सलाहकार के साथ बातचीत की है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं की भविष्य में पुनरावृत्ति न हो।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या रिपोर्ट जमा कर दी गई है, अधिकारी ने कहा, ‘‘नहीं, हम रिपोर्ट जमा नहीं कर सके क्योंकि पिछले सप्ताह बहुत अधिक छुट्टियां थीं।’’

छात्राओं ने आरोप लगाया है कि 28 मार्च को एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान कुछ पुरुषों ने कॉलेज परिसर की चाहरदिवारी पर चढ़कर कई छात्राओं को परेशान किया।

छात्राओं द्वारा विरोध प्रदर्शन करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने ‘छात्राओं द्वारा उठाई गई शिकायतों’ को देखने के लिए एक समिति का गठन किया और समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देने को कहा।

प्राचार्य के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉलेज में विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रही एक छात्रा ने बुधवार को कहा कि विश्वविद्यालय से किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है।

द्वितीय वर्ष की छात्रा शांभवी ने कहा, ‘‘हमारे कॉलेज और प्राचार्य ने बैठकें की हैं। लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा बैठकें आयोजित नहीं की गई हैं। हम अभी भी अधिकारियों से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।’’

पीटीआई ने कॉलेज के प्राचार्य को प्रतिक्रिया के लिए फोन किया और संदेश भेजे लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

इस घटना को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों ने आईपी कॉलेज के बाहर और अंदर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि कॉलेज इस मुद्दे पर आमसभा की बैठक बुलाए।

समिति के सदस्यों में प्रॉक्टर रजनी अब्बी, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर पंकज अरोड़ा, ज्वाइंट प्रॉक्टर गीता सहारे और प्रोफेसर, हिंदी विभाग, मंजू मुकुल कुंबले शामिल हैं।

इस बीच, दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने बुधवार को शैक्षणिक संस्थान में उत्पीड़न की एक घटना पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि एक उत्सव के आयोजन को लेकर पुलिस और इंद्रप्रस्थ कॉलेज के बीच समन्वय की कमी और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण विरोध हुआ।

डीसीडब्ल्यू ने इस मामले में शहर की पुलिस, आईपी कॉलेज फॉर वूमेन और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को अपनी अंतरिम सिफारिशें पेश की हैं।

पुलिस ने घटना के दिन ही मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी और कॉलेज ने उन्हें 4 अप्रैल को 231 शिकायतें और अभ्यावेदन भेजे थे।

डीसीडब्ल्यू ने बताया कि छात्राओं के साथ बातचीत के दौरान, समिति को पता चला कि इस घटना के कारण चार व्यक्ति घायल हुए और एक लड़की को फ्रैक्चर भी हुआ था। डीसीडब्ल्यू ने बताया कि मिरांडा हाउस और गार्गी कॉलेज जैसे डीयू के अन्य कॉलेजों में भी पूर्व में इसी तरह की घटनाएं हुई हैं।

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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