नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) नफरती भाषणों को लेकर राज्यों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की कड़ी टिप्पणी के कुछ दिन बाद एक हिंदू संगठन ने शीर्ष अदालत का रुख कर रामनवमी के मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नफरती भाषणों के खिलाफ राज्यों के कार्रवाई नहीं करने पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि राज्य ‘‘अक्षम और शक्तिहीन’’ हो गया है।
अदालत के हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए गैर सरकारी संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने रामनवमी या ऐसे अन्य मौकों पर निकाले जाने वाले हिंदू धार्मिक जुलूसों के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर, मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा हावड़ा, उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल), सासाराम और नालंदा (बिहार), हैदराबाद (तेलंगाना), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), वडोदरा (गुजरात), जमशेदपुर (झारखंड) समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पूर्व नियोजित तरीके से बड़े पैमाने पर हिंसा की गई है।’’
याचिका में संबंधित राज्य सरकारों को यह निर्देश देने का भी का अनुरोध किया गया है कि हिंसा में घायल हुए या अपनी जान गंवाने वाले लोगों को हुए नुकसान का निर्धारण किया जाए।
याचिका में संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को उन कारणों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश का भी अनुरोध किया गया है जिनके कारण भीड़ के हमले और हिंसा हुई।
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