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Tuesday, 31 March, 2026
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मोदी की डिग्री के मुद्दे को लेकर अरविंद केजरीवाल ने तेज किया हमला

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नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री मामले में गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले ने उनकी शैक्षणिक योग्यता के दावों पर “संदेह” को और बढ़ा दिया है और अगर वह शिक्षित होते तो नोटबंदी जैसे कदम नहीं उठाते।

गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के एक आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री के बारे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया था। उच्च न्यायालय के फैसले के एक दिन बाद आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख की यह टिप्पणी आई है।

भाजपा ने केजरीवाल पर पलटवार किया और कहा कि उनकी टिप्पणी से संकेत मिलता है कि वह या तो अपना विवेक खोने के कगार पर हैं या जांच एजेंसियों द्वारा उनकी सरकार के तहत भ्रष्टाचार के “सबूत” धीरे-धीरे सामने आने के मद्देनजर भविष्य के लिए जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव ने सीआईसी के आदेश के खिलाफ गुजरात विश्वविद्यालय की अपील को स्वीकार करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और उन्हें चार सप्ताह के भीतर गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जीएसएलएसए) में राशि जमा करने का निर्देश दिया।

केजरीवाल ने कहा, “मेरा आज केवल एक ही सवाल है। 21वीं सदी में भारत के प्रधानमंत्री को शिक्षित होना चाहिए या नहीं। क्या भारत को शिक्षित प्रधानमंत्री की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि अगर मोदी की डिग्री वैध है तो गुजरात विश्वविद्यालय उसे दिखा क्यों नहीं रहा।

प्रधानमंत्री पर नए सिरे से निशाना साधते हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के प्रधानमंत्री की अकादमिक योग्यता पर सूचना न देने की दो वजहें हो सकती हैं – यह मोदी का अहंकार हो सकता है या उनकी डिग्री फर्जी है।

केजरीवाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘पूरा देश उच्च न्यायालय के फैसले से स्तब्ध है क्योंकि लोकतंत्र में सूचना मांगने और सवाल पूछने की आजादी होनी चाहिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश ने प्रधानमंत्री की शिक्षा को लेकर संदेह बढ़ा दिया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने गुजरात विश्वविद्यालय या दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की होती तो वे इस जानकारी को छिपाने के बजाय इसका जश्न मना रहे होते।

केजरीवाल ने मोदी की शिक्षा पर सवाल पूछते हुए कहा कि यह सवाल अनिवार्य है क्योंकि देश का ‘‘शीर्ष प्रबंधक’’ होने के कारण मोदी को विज्ञान और अर्थव्यवस्था समेत कई विषयों पर हर दिन कई महत्वपूर्ण फैसले लेने होते हैं।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘अगर प्रधानमंत्री शिक्षित नहीं हैं तो अधिकारी और विभिन्न प्रकार के लोग आएंगे और कहीं भी उनसे हस्ताक्षर करवा लेंगे, उनसे कुछ भी पारित करा लेंगे, जैसे कि नोटबंदी का फैसला जिसके कारण देश को काफी कुछ झेलना पड़ा। अगर प्रधानमंत्री शिक्षित होते तो वह नोटबंदी लागू नहीं करते।’’

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) “एक बहुत अच्छी अवधारणा” थी, लेकिन जिस तरह से मोदी सरकार ने इसे लागू किया, उसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।

उन्होंने कहा, “लोगों से परामर्श किए बिना लाए गए तीनों कृषि कानूनों को अंततः वापस लेना पड़ा… … तो यह तरीका है कि कोई भी शिक्षित न होने पर प्रधानमंत्री को मूर्ख बना सकता है।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि अशिक्षित होना कोई ‘‘अपराध या पाप’’ नहीं है क्योंकि देश में बहुत ज्यादा गरीबी है। उन्होंने कहा, ‘‘हम में से कई अपने परिवार की वित्तीय हालत के कारण औपचारिक शिक्षा पाने की स्थिति में भी नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश में इस तरह की गरीबी है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने हालांकि प्रधानमंत्री पर अपनी टिप्पणी के लिए आप प्रमुख की आलोचना की।

उन्होंने कहा, “आप का भ्रष्टाचार धीरे-धीरे पूरी तरह से स्थापित हो रहा है और अपने बचाव के लिए वह राजनीतिक विमर्श के सबसे निचले स्तर तक गिर गई है।”

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया, “तथ्यों के आधार पर जिस तरह धीरे-धीरे भ्रष्टाचार साबित हो रहा है, वह (केजरीवाल) शायद पागल होने की कगार पर पहुंच गए हैं या भविष्य की किसी रणनीति को ध्यान में रखकर जानबूझकर दबाव में आधार बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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