लखनऊ, 12 मार्च (भाषा) शिया समुदाय ने सरकार से संसद में पारसी समाज की तरह शिया मुसलमानों को भी आरक्षण देने की मांग की है।
समुदाय की समस्याओं के हल और मौजूदा सूरतेहाल पर विचार-विमर्श के लिए शिया मुसलमानों का एक महासम्मेलन रविवार को लखनऊ में आयोजित किया गया, जिसमें सरकार से समुदाय को विशेष पैकेज देने की भी मांग की गई।
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद की अगुवाई में लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिया धर्मगुरुओं ने शिया समुदाय की समस्याओं पर विचार विमर्श किया।
मौलाना जवाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘शिया लगातार पिछड़ते जा रहे हैं चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर आर्थिक और राजनीतिक। हम चाहते हैं कि इस सिलसिले में सरकार से भी मदद ली जाए ताकि शियों के पिछड़ेपन को दूर कर सकें। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुसलमान हर क्षेत्र में पिछड़े हुए है, इसलिए हम यह कह सकते हैं कि शिया अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक हैं, उनसे ज़्यादा कौन पिछड़ा हो सकता हैं?’
उन्होंने कहा कि शिया समुदाय का संसद में कोई प्रतिनिधि नहीं है। सरकार से मांग है कि वह पारसी समुदाय की तरह शिया समुदाय के लिए भी संसद में आरक्षण उपलब्ध कराए। साथ ही शिया समुदाय को विशेष पैकेज भी दिया जाए।
उन्होंने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि शिया समुदाय के युवाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण, आर्थिक पैकेजों में आरक्षण, संसद और विधानसभा में आरक्षण मिलना चाहिए और सरकार को वक्फ संपत्ति से सभी अतिक्रमण हटाने चाहिए।’
शिया धर्मगुरु ने कहा, ‘लखनऊ में ही तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां उम्मीदवारों की हार-जीत शिया मुसलमानों के वोट से ही तय होती है लेकिन फिर भी हमें नजरअंदाज किया जा रहा है।’
जवाद ने कहा कि शिया समुदाय को सरकार का फायदा लेने के लिए राजनीतिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। जो समुदाय सियासी रूप से मजबूत नहीं होता उसे कोई लाभ नहीं मिलता।
जवाद ने कहा कि सरकार पसमांदा मुस्लिमों की बात करती रहती है, लेकिन असल में पसमांदा की बड़ी संख्या शिया समुदाय में है।
महा सम्मेलन में आए शिया धर्मगुरुओं और उलमा ने कहा कि शियों के विकास और कल्याण के लिए अलग-अलग स्तरों पर योजना बनाने और काम करने की ज़रूरत है।
भाषा सलीम अर्पणा
अर्पणा
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