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Tuesday, 31 March, 2026
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महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित करने की मांग को लेकर बीआरएस नेता कविता भूख हड़ताल पर

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(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेशी से एक दिन पहले भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के कविता ने काफी समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को 13 मार्च से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पारित करने की मांग को लेकर शुक्रवार को भूख हड़ताल की।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छह घंटे की भूख हड़ताल की शुरुआत की। उन्होंने मोदी सरकार से मांग की कि वह महिला आरक्षण विधेयक को संसद के इसी सत्र में पेश करे।

भूख हड़ताल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के श्याम रजक, समाजवादी पार्टी (सपा) की सीमा शुक्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की प्रवक्ता, तेलंगाना की शिक्षा मंत्री सविता इंद्र रेड्डी और महिला एवं बाल विकास मंत्री सत्यवती राठौड़ भी शामिल हुईं। इसमें आंध्र प्रदेश की महिला नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह और चित्रा सरवारा, अकाली दल के नरेश गुजराल, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अंजुम जावेद मिर्जा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की शमी फिरदौस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुष्मिता देव, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के केसी त्यागी, राकांपा की सीमा मलिक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नारायण के और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की प्रियंका चतुर्वेदी के अलावा कांग्रेस के पूर्व नेता कपिल सिब्बल ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है, जो शाम चार बजे खत्म होगी।

येचुरी ने अपने भाषण में कहा, “हमारी पार्टी विधेयक के पारित न होने तक, इस विरोध-प्रदर्शन में कविता का समर्थन करेगी। राजनीति में महिलाओं को बराबरी का मौका देने के लिए इस विधेयक को लाना जरूरी है।”

येचुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 2014 में पहली बार संसद में कदम रखा था, तब उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण विधेयक उनकी सरकार की प्राथमिकता होगा।

माकपा नेता ने आगे कहा कि नौ साल बीत चुके हैं, लेकिन यह विधेयक फिर से संसद में नहीं पेश किया जा सका है।

येचुरी ने कहा, “काफी कोशिशों के बाद सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण दिया। अगर आप पंचायत में महिलाओं को आरक्षण दे सकते हैं, तो संसद में क्यों नहीं?” उन्होंने दावा किया कि कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता, जब तक कि वह महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में समान अवसर नहीं मुहैया कराता।

येचुरी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में लाना जरूरी है और माकपा इस विरोध-प्रदर्शन में बीआरएस के साथ खड़ी रहेगी।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च को शुरू होकर छह अप्रैल को समाप्त होगा।

भूख हड़ताल पर बैठीं कविता ने कहा, “अगर भारत को विकसित होना है, तो महिलाओं को राजनीति में अहम भूमिका निभानी होगी। इसके लिए पिछले 27 साल से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को लाना जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि 1996 से लेकर अब तक कई राजनीतिक दलों ने इस विधेयक को पेश करने की कोशिश की, लेकिन यह संसद में पारित नहीं हो सका।

कविता ने कहा कि सुषमा स्वराज, सोनिया गांधी और बृंदा करात जैसी नेताओं ने राजनीति में महिलाओं को आरक्षण को संभव बनाने के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने कहा, “मैं इस आंदोलन को आगे ले जाने का अवसर पाकर बहुत खुश हूं। मैं भारत की महिलाओं से वादा करती हूं कि विधेयक के पेश होने और इसे मंजूरी मिलने तक हम इस विरोध-प्रदर्शन को जारी रखेंगे।”

बीआरएस नेता ने कहा कि यह तो शुरुआत भर है और देशभर में विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली सरकार होना एक ऐतिहासिक अवसर है।

कविता ने कहा, “हम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वह यह विधेयक पेश करे, हम सभी राजनीतिक दलों को एक साथ लाएंगे और संसद में आपका समर्थन करने की कोशिश करेंगे।”

राजद नेता श्याम रजक ने कहा कि महिलाओं के पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बिना भारतीय लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत से अधिक आरक्षण होना चाहिए।

महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 12 सितंबर 1996 को सबसे पहले संयुक्त मोर्चा सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था।

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने भी इस विधेयक को लोकसभा के पटल पर रखा था, लेकिन यह तब भी पारित नहीं हो सका था।

मई 2008 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पहली सरकार ने एक बार फिर महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, जिसे राज्यसभा ने एक स्थाई समिति के पास भेज दिया।

2010 में राज्यसभा ने महिला आरक्षण विधेयक पर मुहर लगा दी, जिसके बाद इसे लोकसभा की मंजूरी के लिए भेजा गया। इसके बाद से यह विधेयक ठंडे बस्ते में है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी कविता ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यह विधेयक वर्ष 2010 से ठंडे बस्ते में है और मोदी सरकार के पास 2024 के आम चुनाव से पहले इसे पारित कराने का ऐतिहासिक मौका है।

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 और 2019 के आम चुनाव में वादा किया था कि उनकी सरकार महिला आरक्षण विधेयक लाएगी और यह वादा भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल था।

कविता ने कहा था कि किसी भी भाजपा नेता ने यह मुद्दा नहीं उठाया है और बहुमत होने के बावजूद मोदी सरकार संसद में विधेयक पारित कराने में नाकाम रही है, “जो बहुत ही दुखद है।”

कविता ने कहा था कि भूख हड़ताल की योजना एक सप्ताह पहले बनाई गई थी, लेकिन ईडी ने उन्हें प्रस्तावित हड़ताल से ठीक एक दिन पहले नौ मार्च को पेशी के लिए तलब किया था। हालांकि, जांच एजेंसी हड़ताल के एक दिन बाद 11 मार्च को उनका बयान दर्ज करने के लिए सहमत हो गई।

ईडी ने बीआरएस नेता को दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में तलब किया है।

भाषा

पारुल हक मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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