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Sunday, 29 March, 2026
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अधिवक्ता संघ ने भाजपा विधायक की अग्रिम जमानत याचिका शीघ्र सूचीबद्ध होने पर प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखा

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बेंगलुरु, आठ मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मदल विरूपक्षप्पा की अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका जल्द सूचीबद्ध होने पर बेंगलुरु के अधिवक्ता संघ (एडवोकेट्स एसोसिएशन) ने चिंता जताते हुए उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

विरूपक्षप्पा पर अपने बेटे प्रशांत कुमार एम वी के जरिए रिश्वत लेने का आरोप है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकार के समर्थन के बिना ऐसा नहीं होगा।

‘कर्नाटक सोप्स एंड डिटरजेंट्स लिमिटेड’ (केएसडीएल) ठेका घोटाले में मुख्य आरोपी और विधायक विरूपक्षप्पा को उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अग्रिम जमानत दे दी। विरूपक्षप्पा ने अपने बेटे की गिरफ्तारी के बाद केएसडीएल के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मदल परिवार के घर और कार्यालयों में जांच की, जिसमें 8.23 करोड़ रुपये नकद बरामद किये गये।

देश के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को लिखे एक पत्र में, संघ के अध्यक्ष विवेक सुब्बा रेड्डी और महासचिव टी जी रवि ने भी इस बात को रेखांकित किया कि न्याय सबके लिए समान होना चाहिए।

संघ ने अपने पत्र में कहा, ‘कर्नाटक उच्च न्यायालय में आम तौर पर अग्रिम जमानत जैसे नए मामलों को सूचीबद्ध होने में कई दिन और कई सप्ताह लगते हैं, लेकिन वीआईपी (अति महत्वपूर्ण लोगों से जुड़े) मामलों पर तुरंत विचार किया जाता है।’

पत्र में कहा गया है कि इस चलन से न्यायिक प्रणाली के प्रति आम आदमी का विश्वास कम हो जाएगा और विधायक को भी एक आम आदमी माना जाना चाहिए।

संघ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपील की कि वह सभी अग्रिम जमानत याचिकाओं को एक दिन में सूचीबद्ध करने का रजिस्ट्री को निर्देश दें ‘ताकि आम आदमी के साथ भी वीआईपी की भांति व्यवहार हो सके।’

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामलिंगा रेड्डी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि विधायक को एक दिन में जमानत मिलने में सरकार भी शामिल थी।

रेड्डी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सरकारी समर्थन या सरकारी वकीलों की मदद के बिना किसी विधायक को सिर्फ एक दिन में ही जमानत कैसे मिल सकती है? सिर्फ एक दिन में जमानत मिलना संभव नहीं है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्षी नेता पकड़े जाते हैं तो उन्हें दो-तीन महीने तक जमानत नहीं मिलती और सरकारी वकील जमानत के खिलाफ बहस करते हैं।

भाषा अविनाश संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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