नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को कारोबार का मिला जुला रुख रहा। एक ओर जहां सरसों तेल तिलहन कीमतों में गिरावट आई वहीं सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में मामूली सुधार आया। मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 0.85 प्रतिशत की तेजी रही और शाम के कारोबार के लिए बाजार नहीं खुलेगा। शिकागो एक्सचेंज फिलहाल 0.4 प्रतिशत नीचे चल रहा है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार द्वारा सूरजमुखी और सोयाबीन के शुल्कमुक्त आयात की छूट समाप्त करने की घोषणा के बाद इन दोनों तेलों के थोक मूल्य में और गिरावट देखी गई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने शुल्कमुक्त आयात की छूट समाप्त कर एक अच्छा कदम उठाया है और आगे देशी तेल तिलहनों की बाजार में खपत बढ़ाने के लिए सरकार को सस्ते आयातित सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क लगाने के बारे में जल्द पहल करना होगा।
सूत्रों ने कहा कि सरकार ने सहकारी संस्था, नाफेड द्वारा सरसों की खरीद कराने का फैसला, सरसों या देशी तेल तिलहनों के खपने की स्थिति निर्मित करने के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि नाफेड को खरीदे गये फसल की देखरेख, वारदाना जैसे तमाम खर्चे और पड़ेंगे और इन तेलों की पेराई भी नहीं हो पायेगी।
दूसरा नाफेड थोड़ी मात्रा में ही किसानों की फसल खरीद कर पायेगी। नाफेड के बजाय अगर सहकारी संस्था, हाफेड कुछ खरीद करती तो उसके पास हरियाणा में दो पेराई मिलें भी हैं। वहां इसकी पेराई करने के बाद तेल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में दिया जा सकता है। नाफेड के खरीद करने से स्टॉक पड़ा रहेगा और देश में खाद्य तेलों का आयात बढ़ेगा ही। इन बातों की ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण देशी तेल तिलहनों के लिए बाजार बनाना होना चाहिये। सरकार को आयात-निर्यात नीति, आयात शुल्क लगाने या छूट देने संबंधी फैसले इस बात को ध्यान में रखकर लेने पड़ेंगे तभी देशी तेल तिलहनों का बाजार बनेगा, किसानों को अपनी उपज के बिकने एवं अच्छी कीमत प्राप्त होने का भरोसा होने पर वे निरंतर तिलहन उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
इस बार ब्राजील में सोयाबीन की बंपर फसल है और उसके बाजार में आने पर देशी तेल तिलहनों का टिकना मुश्किल हो सकता है। इन सभी बारीकियों को ध्यान में रखकर ही देश में तेल तिलहन उत्पादन सतत रूप से आगे बढ़ाते रहने का प्रयास जारी रखना होगा।
सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन तेल के दाम ऊंचा बोले जा रहे हैं और इस वजह से इसमें मजबूती दिख रही है पर लिवाल कम हैं। मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत होने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में भी सुधार है। दूसरी ओर नये फसल की आवक बढ़ने से सरसों तेल तिलहन में गिरावट है। जबकि डी-आयल्ड केक (डीओसी) की साधारण मांग से सोयाबीन तिलहन तथा सामान्य मांग के बीच मूंगफली तेल तिलहन के साथ साथ बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर ही बने रहे।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 5,470-5,520 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,825-6,885 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,825 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 11,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,785-1,815 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,745-1,870 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,650 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,320-5,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,060-5,080 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
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