नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने उच्चतम न्यायलय की संविधान पीठ द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में दिए गए फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि ‘बहुत ज्यादा समझौता करने वाला निर्वाचन आयोग’ अब ‘अत्यंत सक्षम’ बन सकता है।
उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने बृहस्पतिवार को फैसला दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश शामिल होंगे।
ओब्रायन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘बहुत बड़ा (फैसला)। इसलिए बहुत अधिक समझौता करने वाला (निर्वाचन आयोग) फिर से अत्यंत सक्षम (निर्वाचन आयोग) बनने का प्रयास कर सकता है।’’
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अपने फैसले में कहा कि यह नियम तब तक कायम रहेगा जब तक कि संसद इस मुद्दे पर कानून नहीं बना देती।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं हैं तो सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संबंधी समिति में शामिल किया जाएगा।
पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र मनीषा
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