नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) रिलायंस कैपिटल के ऋणदाताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को बताया कि दबाव वाली संपत्ति के ऊंचे मूल्यांकन के लिए मोलभाव को लेकर ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) मे अधिकारों में कोई कमी नहीं की गई है।
लेनदारों की ओर से अदालत में अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य परिसंपत्ति की कीमत को अधिकतम करना है और सीओसी नियमों के साथ वार्ता करने के लिए स्वतंत्र है।
रिलायंस कैपिटल के ऋणदाताओं ने दिवाला कंपनी की नीलामी पर रोक लगाने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी।
भाषा अनुराग अजय
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