नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने सरकारी स्वामित्व वाले एफसीआई से कहा है कि वह किसानों के लाभ के लिए उत्तर प्रदेश के सभी राजस्व जिलों को शामिल करते हुए अधिक खरीद केंद्र खोले तथा कीमतों को कम करने के लिए खुले बाजार में अधिक गेहूं की बिक्री करे।
मंत्री ने लखनऊ में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के उत्तर प्रदेश में संचालन की समीक्षा करते हुए यह बात कही।
एफसीआई खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए सरकार की प्रमुख एजेंसी है।
एक सरकारी बयान के अनुसार, गोयल ने एफसीआई के अधिकारियों से कहा कि अधिक पारदर्शिता और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप को लेकर खाद्यान्न प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें।
उन्होंने सभी अधिकारियों से एफसीआई के कामकाज को और अधिक कुशल और आधुनिक बनाने के लिए अपने सुझाव भेजने को कहा।
गोयल ने एफसीआई के अधिकारियों को खाद्यान्न प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने और सीमित भूमि क्षेत्र में उच्च भंडारण क्षमता निर्मित करने के लिए गोदामों के बेहतर डिजाइन देने का सुझाव देने का भी निर्देश दिया।
उन्होंने गेहूं और धान खरीद से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि एफसीआई लगभग सभी राजस्व जिलों को शामिल करते हुए अधिक खरीद केंद्र खोले ताकि किसानों के पास अपनी उपज एफसीआई या किसी अन्य एजेंसी को बेचने का विकल्प हो।
मंत्री ने उत्तर प्रदेश के खरीद केंद्रों पर ई-पीओपी मशीन के उपयोग की सराहना की और सलाह दी कि किसानों से खरीद प्रणाली में और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए अन्य राज्यों में भी इसी प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए।
बयान के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि गेहूं के बाजार मूल्य को नियंत्रित करने के लिए खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) में अधिक मात्रा में गेहूं की बिक्री की जानी चाहिए।
केंद्र ने हाल ही में गेहूं और गेहूं के आटे (आटे) की कीमतों को कम करने के लिए 30 लाख टन गेहूं को खुले बाजार में लाने का फैसला किया है। तीस लाख टन में से 25 लाख टन गेहूं आटा चक्की वालों जैसे थोक उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है।
गोयल ने राज्य में भंडारण क्षमता की समीक्षा करते हुए कहा कि एफसीआई के स्वामित्व वाले और किराए के सभी गोदाम उच्चतम स्तर के होने चाहिए।
भाषा राजेश राजेश रमण
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