नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) आर्थिक शोध संस्थान ‘द ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव’ ने शुक्रवार को कहा कि आम बजट में महंगी धातुओं, छोटी कारों, साइकिलों, खिलौनों और दूरसंचार उपकरणों पर लगने वाले सीमा-शुल्क में जो बदलाव किए गए हैं, उससे सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा मिलेगा।
द ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने यह भी कहा कि बजट में आयात शुल्क में बदलाव का प्रभाव उन उत्पादों पर होगा जो भारत के मौजूदा आयात में दो प्रतिशत या 14 अरब डॉलर से कम हिस्सेदारी रखते हैं।
जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘बजट का बड़ा हिस्सा स्लैब कम करने और छूट से जुड़ा है। सरकार ने मौजूदा आयात शुल्क ढांचे को बरकरार रखा है और बदलाव सिर्फ वहीं पर किए गए हैं जहां ऐसा करने का बड़ा कारण मौजूद है।’’
श्रीवास्तव ने कहा कि जहां शुल्क बढ़ाया गया है उन उत्पादों का संयुक्त आयात मूल्य 12 अरब डॉलर या फिर 2022 में भारत के कुल व्यापारिक आयात का 1.6 फीसदी है।
जिन वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया गया है उनमें अप्रसंस्कृत चांदी, विनाइल क्लोराइड, नेफ्था, सोने के आभूषण, छोटी कारें, साइकिल और खिलौने शामिल हैं।
भाषा
मानसी पाण्डेय
पाण्डेय
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