अहमदाबाद, दो फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने बृहस्पतिवार को “गैरकानूनी इंटरनेट व्यवहार और साइबर अपराधों” से निपटने के लिए एक कड़े कानून की मांग की।
वह गांधीनगर में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय में 25वें अखिल भारतीय फोरेंसिक विज्ञान सम्मेलन के उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, “साइबर नैतिकता को बढ़ावा देना आवश्यक है। गैरकानूनी इंटरनेट व्यवहार और साइबर अपराधों को दंडित करने के लिए सरकार द्वारा कड़े कानून होने चाहिए।”
उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपने कानूनों में संशोधन किया है “विशेष रूप से नए प्रकार के अपराधों के आगमन के साथ-साथ साइबर अपराधों से निपटने के लिए”।
मिश्रा ने कहा कि “सोशल मीडिया और साइबर स्पेस” के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व्यक्तियों या मीडिया को दी गई स्वतंत्रता से “बड़ी” नहीं है।
उन्होंने कहा, “मीडिया या व्यक्तियों को दी गई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वही है जो सोशल मीडिया या साइबर स्पेस को दी गई है। यह उससे बड़ी नहीं है। इसलिए, साइबर अपराध से निपटने के लिए कड़े कानून होने चाहिए। हमें दुरुपयोग से बहुत सख्ती से निपटने की जरूरत है।”
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
