नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग ने सोमवार को संसद की एक समिति के समक्ष कहा कि घरेलू विस्थापन के कारण लोगों के मतदान नहीं कर पाने तथा ‘शहरी एवं युवाओं की उदासीनता’ के चलते मतदान प्रतिशत कम रह जाता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
बैठक में दूरस्थ मतदान की व्यवहार्यता पर विचार-विमर्श के दौरान निर्वाचन आयोग तथा विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी स्थायी संसदीय समिति के समक्ष अपनी बात रखी।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह करीब 30 करोड़ मतदाताओं के मताधिकार का उपयोग नहीं करने तथा विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मतदान प्रतिशत के मुद्दे पर हमेशा चिंतित रहा है।
आयोग ने कहा कि किसी मतदाता के मतदान नहीं करने के अनेक कारण होते हैं।
उसने प्रस्तुतिकरण के दौरान कहा, ‘‘शहरी उदासीनता और युवाओं की उदासीनता जैसे अनेक कारणों के बीच घरेलू या आंतरिक विस्थापन की वजह से मतदान नहीं कर पाना भी कम मतदान प्रतिशत रहने की एक प्रमुख वजह है।’’
प्रवासी मतदाताओं के लिए दूरस्थ मतदान के विषय पर समिति के साथ चर्चा करते हुए आयोग ने कहा कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श की आवश्यकता वाले अनेक मुद्दों पर कानूनी, वैधानिक, प्रशासनिक और तकनीकी हस्तक्षेपों की जरूरत है।
आयोग ने दूरस्थ मतदान को ‘महत्वपूर्ण विषय’ बताते हुए कहा कि वह इस पर सक्रियता से विचार कर रहा है।
आयोग ने कहा कि उसके विचार से दूरस्थ मतदान के लिए प्रौद्योगिकी भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की तरह स्वतंत्र होनी चाहिए और किसी भी तरह के नेटवर्क से जुड़ी नहीं होनी चाहिए।
उसने कहा कि वह ‘इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (ईसीआईएल), ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ तथा तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति के साथ इस दिशा में काम कर रहा है।
भाषा वैभव अविनाश
अविनाश
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