नयी दिल्ली, 31 दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबित दीवानी मामलों में जानबूझकर ”निरर्थक” दलीलें दाखिल करने को नामंजूर करते हुए कहा कि इससे न्यायिक समय की बर्बादी होती है और मुख्य मामले के निष्कर्ष में बाधा आती है।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि जब तक बार और पीठ जिम्मेदारी तय करने के लिए एक साथ नहीं आते, तब तक मुख्य मामले लटके रहेंगे।
मई 2021 में मरने वाले एक व्यक्ति की वसीयत से उत्पन्न मुद्दों से संबंधित एक लंबित मामले में दायर एक आवेदन को खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि अदालत देश के नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्य के प्रति सचेत है और इसलिए इस तरह की टिप्पणी करने के लिए विवश है।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
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