(सुष्मिता गोस्वामी)
गुवाहाटी, 22 दिसंबर (भाषा) आजादी के बाद से ही असम में एक प्रभावशाली ताकत रही कांग्रेस ने पिछले आठ वर्षों में यहां अपने जनाधार को खिसकते देखा है। लेकिन, राज्य में प्रदेश कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया ने पार्टी नेतृत्व को खुश होने की वजह दे दी है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यात्रा ने भले ही राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है, लेकिन इसका चुनावी लाभ होगा या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।
प्रदेश कांग्रेस की ‘भारत जोड़ा यात्रा’ का 45 दिनों में 535 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पिछले हफ्ते असम के सबसे पूर्वी बिंदु सादिया में समापन हुआ।
असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने कहा कि यात्रा ने पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने का काम किया है, खासकर चुनावी हार के बाद।
वहीं, लोकसभा सदस्य अब्दुल खलीक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लोगों से उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली। कुछ लोगों ने सोचा था कि यात्रा जब अल्पसंख्यक बहुल इलाकों से बाहर निकलेगी तो इसमें भारी संख्या में जनता की भागीदारी नहीं दिखेगी। लेकिन सभी जाति और समुदायों के लोग हमारे साथ शामिल हुए।’’
गुवाहाटी स्थित हांडिक गर्ल्स कॉलेज में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर पल्लवी डेका का मानना है कि यात्रा ने देशभर में कांग्रेस के समर्थकों में जोश भरने का काम किया है, लेकिन उन्होंने पार्टी की चुनावी किस्मत पर इसका कोई असर पड़ने को लेकर संदेह जताया।
कांग्रेस ने आजादी के बाद से 1980 के दशक के मध्य तक असम में शासन किया, लेकिन इस दौरान तीन साल की अल्प अवधि के लिए (वर्ष 1977-79) इसे जनता दल सरकार को सत्ता सौंपनी पड़ी।
कांग्रेस को राज्य में पहली बार तब चुनौती का सामना करना पड़ा, जब 1979 से 1985 तक चले असम आंदोलन ने इसे झकझोर कर रख दिया। नए दल असम गण परिषद (एजीपी) का कांग्रेस के विकल्प के रूप में उदय हुआ और इसने वर्ष 1985 में सत्ता हासिल कर ली।
हालांकि, वर्ष 1991 में कांग्रेस सत्ता वापस पाने में कामयाब रही। इसके बाद 1996 में फिर से एजीपी की अगुवाई में सरकार का गठन हुआ। लेकिन इसके बाद वर्ष 2001 से 2014 तक कांग्रेस सत्ता में रही।
वर्ष 2014 में असम की सत्ता एक बार फिर कांग्रेस के हाथों से फिसल गई, क्योंकि पार्टी के उदीयमान सितारे हिमंत विश्व शर्मा कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। शर्मा के साथ आने के बाद असम विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पहली बड़ी जीत हासिल की। पार्टी तब से राज्य में सत्ता में है।
भाषा
संतोष पारुल
पारुल
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