(जे वी शिव प्रसन्न कुमार)
चेन्नई, 18 दिसंबर (भाषा) तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग ने मंदिरों की संपत्ति को अतिक्रमण से बचाने की कोशिशों के तहत अपने अधीन करीब एक लाख एकड़ भूमि का सर्वेक्षण किया है।
विभाग को भूमि सर्वेक्षण और अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए ‘डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (डीजीपीएस) और ‘भौगोलिक सूचना प्रणाली’ (जीआईएस) जैसी आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों की मदद से राज्यभर में शेष 3.5 लाख एकड़ मंदिर भूमि का सर्वेक्षण जल्द पूरा कर लेने की उम्मीद है।
एचआर एंड सीई आयुक्त जे कुमारगुरुबरन ने कहा, ‘‘मंदिर की जमीनों के सर्वेक्षण का काम तेजी से चल रहा है और हमें पूरा काम जल्द ही पूरा हो जाने की उम्मीद है।’’
सर्वेक्षण के दौरान लगभग 172 लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षकों ने शुरू में गांव की सीमाओं और फिर सभी भूखंडों की सीमाओं को मापा। भूमि सीमाओं को सटीकता से मापने के लिए डीजीपीएस उपकरण का उपयोग किया जाता है। डिजिटल डेटाबेस बनाने के लिए जमीनी माप को जीआईएस प्रारूप में भौगोलिक डेटा विशेषताओं से जोड़ा जाता है।
कुमारगुरुबरन ने कहा, ‘‘सर्वेक्षकों को 66 डीजीपीएस उपकरणों से लैस किया गया है।’’
आयुक्त ने बताया कि गांवों में मंदिर की भूमि के सर्वेक्षण के बाद सर्वेक्षणकर्ताओं ने ‘कोलैबलैंड सॉफ्टवेयर’ का उपयोग करके 50 रेखाचित्रों के स्केच तैयार किए हैं।
एचआर एंड सीई विभाग राज्य में लगभग 38,658 हिंदू और 17 जैन धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करता है। उसके नियंत्रण में लगभग 4.78 लाख एकड़ मंदिर भूमि है।
अभी तक विभाग के अधीन 20 क्षेत्रों में लगभग 96,437.11 एकड़ भूमि का सर्वेक्षण किया जा चुका है। जून में लगभग 50,000 एकड़ भूमि का सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन अक्टूबर के अंत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के आगमन से सर्वे कार्य की रफ्तार धीमी पड़ गई।
भाषा सिम्मी पारुल
पारुल
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