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Friday, 6 February, 2026
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सिल्वरलाइन परियोजना के अधर में लटकने से जमीन मालिकों की मुश्किलें बढ़ीं

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(हैरी एम पिल्लै)

कोट्टयम (केरल), 11 दिसंबर (भाषा) केरल के कोट्टयम जिले में रोसलिन फिलिप और लिजी के लिए उनकी कुछ वर्ग फीट में फैली जमीन का अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह जमीन सिल्वरलाइन परियोजना के लिए चुनी गई है, लेकिन लालफीताशाही के कारण इस पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

दोनों अपनी जमीन को ‘बेकार’ बताती हैं। वे कहती हैं कि उनकी जमीन को सेमी हाईस्पीड रेल गलियारे ‘सिल्वरलाइन’ परियोजना के निर्माण के लिए चुना गया है, जिसके निकट भविष्य में शुरू होने के आसार नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार केंद्र की हरी झंडी का इंतजार कर रही है।

वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार दावा कर रही है कि वह दक्षिणी राज्य में यह परियोजना लागू करने पर अडिग है, लेकिन के-रेल सर्वेक्षण पत्थर लगाने का काम बंद करने और सामाजिक असर का आकलन करने के लिए तैनात कर्मियों को कहीं और तैनात किए जाने जैसे उसके कदम अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं।

सरकार की कथनी और करनी में इस फर्क ने न केवल सिल्वरलाइन परियोजना का भविष्य अधर में लटका दिया है, बल्कि इसके कारण रेल गलियारे के लिए निर्धारित 3,000 एकड़ से अधिक जमीन भी व्यर्थ पड़ी है।

चंगनसेरी की रोसलिन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यहां एक सेंट जमीन की कीमत करीब तीन लाख रुपये है, लेकिन कोई भी इसे खरीदने के लिए आगे नहीं आ रहा है। अगर हम बैंक से कर्ज लेने जाते हैं तो वे या तो इनकार कर देते हैं या बहुत कम धनराशि की पेशकश करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी जमीन सिल्वरलाइन परियोजना के लिए इस्तेमाल की जानी है।’’

मंडापल्ली की लिली ने भी ऐसा ही अनुभव बयां किया। उसने कहा, ‘‘कोई जमीन नहीं खरीदना चाहता। कोई भी सहकारी बैंक इसके बदले में कर्ज नहीं दे रहा है। जो लोग कर्ज देना चाहते हैं, वे बहुत कम धनराशि की पेशकश कर रहे हैं।’’

रोसलिन ने यह भी कहा कि वह अनानास उगाने के लिए भी अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है, क्योंकि वाम दल के कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले कुछ लोग फसलों को बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं।

कोट्टयम जिले के मुलाक्कुलम गांव के रहने वाले एम टी थॉमस ने भी ऐसी ही परेशानी जाहिर की है।

थॉमस ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘3,000 एकड़ से अधिक जमीन बेकार पड़ी है, क्योंकि राज्य सरकार ने अपनी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना वापस नहीं ली है। अधिसूचना जारी होने के कारण हम अपनी संपत्ति के संबंध में कोई लेन-देन नहीं कर पाएंगे।’’

बहरहाल, केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन और राज्य के राजस्व मंत्री के राजन ने विधानसभा में कहा है कि लोगों के सामने जमीन को बेचने या गिरवी रखने में कोई बाधा नहीं है, क्योंकि न तो राज्य सरकार और न ही केरल रेल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (केआरडीसीएल) ने इस पर दावा जताया है।

थॉमस ने इन बयानों को ‘भ्रामक’ बताया। उसने कहा, ‘‘वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मैं बैंक प्रबंधक था। अगर मुझे गिरवी रखने के लिए किसी जमीन का सत्यापन करना होता है तो वहां सर्वेक्षण का पीला पत्थर देखने के बाद मैं उसे ऋणमुक्त सत्यापित नहीं कर सकता हूं।’’

थॉमस ने दावा किया, ‘‘जब तक राज्य सरकार उन जमीनों के अधिग्रहण के लिए अपनी अधिसूचनाएं वापस नहीं ले लेती, तब तक संबधित संपत्ति पर सरकार का अधिकार माना जाएगा। कोई उसे खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकता’’

सिल्वरलाइन सेमी हाईस्पीड रेल गलियारे का उद्देश्य केरल के उत्तरी और दक्षिणी भाग के बीच परिवहन को आसान बनाना और यात्रा का समय मौजूदा 12 से 14 घंटे से घटाकर चार घंटे तक करना है।

भाषा

गोला पारुल

पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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