पुणे, 22 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने देश के सभी औषधि नियंत्रक अधिकारियों से इंजेक्शन ‘ओरोफर एफसीएम’ के एक खास बैच का इस्तेमाल रोकने को कहा है। एफडीए ने यह कदम मुंबई के एक अस्पताल में इस दवा के कथित रूप से दुष्प्रभाव की वजह से एक मरीज़ की मौत होने के बाद उठाया है।
एफडीए के पुणे मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि दवाई के कथित दुष्प्रभाव की वजह से मुंबई के सैफी अस्पताल में एक मरीज़ की मौत हुई है।
‘ओरोफर एफसीएम’ इंजेक्शन का इस्तेमाल लौह अल्पताजन्य आरक्तता (आयरन डेफिशिएन्सी एनीमिया) का इलाज करने के लिए किया जाता है।
एफडीए (औषधि) के संयुक्त आयुक्त एसबी पाटिल ने कहा कि दवा बनाने वाली एमक्योर फार्मास्युटिकल्स से दवाई का खास बैच वापस मंगाने के लिए कहा गया है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के मुताबिक, हो सकता है कि बाजार में इंजेक्शन ओरोफर के नाम से नकली दवाई उपलब्ध हो और उसका दुष्प्रभाव पड़ा हो।
पाटिल ने कहा कि कंपनी ने एफडीए से कहा है कि इसकी एक अन्य दवा का नकली संस्करण पहले से ही बाजार में है।
उन्होंने कहा, “ मुंबई एफडीए की टीम मौत के मामले की जांच कर रही है।” अधिकारी के मुताबिक, वितरकों से दवा के खास बैच के नमूने ले लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने बाजार में उपलब्ध नकली दवाइयों के कारण दुष्प्रभाव होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और एफडीए में शिकायतें दर्ज कराई थीं।
उसने यह भी कहा कि वह ‘ओरोफर एफसीएम’ के खास बैच को बाजार से वापस मंगा रही हैं, हालांकि उनकी दवा मानक गुणवत्ता की है।
कंपनी के मुताबिक, वह अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है।
भाषा
नोमान माधव
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