नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बच्चे की गर्भ में या जन्म लेते ही मृत्यु (स्टिलबर्थ) के मामलों का अध्ययन करने के लिहाज से सहयोगात्मक, बहुसंस्थागत और अंतर-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अपने ‘टास्क फोर्स प्रोग्राम’ के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं।
आईसीएमआर के अधिकारियों के अनुसार बच्चे की गर्भ में या प्रसव के दौरान मृत्यु की समस्या से दुनियाभर में रोजाना लाखों महिलाएं और परिवार प्रभावित होते हैं।
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ लोकेश शर्मा ने कहा कि गर्भ में या जन्म लेते ही मृत्यु के मामलों की दर देश की चिकित्सा प्रणाली की गुणवत्ता का एक संकेतक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में जोखिम वाले कारकों की समय पर पहचान तथा जन्मपूर्व उचित प्रबंधन से इस समस्या के समाधान में मदद मिल सकती है।
भारत सरकार ‘भारतीय नवजात कार्य योजना’ (आईएनएपी) के तहत जन्म लेते ही बच्चे की मौत के मामलों की संख्या 2030 तक एक अंक पर लाना चाहती है। परिषद के अनुसार इस मामले में कारकों का अध्ययन करने के लिए अनुसंधान की जरूरत है।
भाषा वैभव माधव
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