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Friday, 1 May, 2026
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भूमि अतिक्रमण के आरोप से असम-अरुणाचल सीमा पर तनाव

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लखीमपुर (असम), 19 जुलाई (भाषा) असम के धेमाजी जिले में लोगों के एक समूह ने पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश के कुछ निवासियों द्वारा कथित भूमि अतिक्रमण पर आपत्ति जताई है, जिससे विवादित अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लोगों ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ लोगों ने कृषि फार्म स्थापित करने के लिए पनबारी में आरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर लिया था और क्षेत्र की घेराबंदी कर दी थी।

उन्होंने कहा कि असम की ओर के स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और बाड़ हटा दी, जबकि अरुणाचल प्रदेश के कुछ बदमाशों ने सोमवार शाम एक असमिया परिवार पर हमला किया और उनकी मोटरसाइकिल छीन ली।

अधिकारी ने बताया कि धेमाजी के बोरदोलोनी चौकी से पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच चर्चा भी हुई। उन्होंने कहा, ‘‘स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है और इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।’’

घटना असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और उनके अरुणाचल प्रदेश समकक्ष पेमा खांडू द्वारा 15 जुलाई को ‘नमसाई घोषणा’ पर हस्ताक्षर करने के तीन दिन बाद हुई, जिसमें उन्होंने दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने का वादा किया था।

दोनों राज्यों ने ‘विवादित गांवों’ की संख्या पिछले 123 के बजाय 86 तक सीमित करने का भी फैसला किया था और 15 सितंबर तक मुद्दों को हल करने का प्रयास करेंगे। दोनों राज्य 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं।

अरुणाचल प्रदेश को 1972 में एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। उसकी शिकायत है कि मैदानी इलाकों में कई वन क्षेत्र जो परंपरागत रूप से पहाड़ी आदिवासी प्रमुखों और समुदायों के थे, उन्हें एकतरफा तरीके से असम में स्थानांतरित कर दिया गया था।

अरुणाचल प्रदेश को 1987 में राज्य का दर्जा मिलने के बाद त्रिपक्षीय समिति नियुक्त की गई जिसने सिफारिश की कि कुछ क्षेत्रों को असम से अरुणाचल में स्थानांतरित कर दिया जाए। असम ने इसका विरोध किया और मामला उच्चतम न्यायालय में है।

भाषा सुरभि माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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