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Friday, 27 March, 2026
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पाटिल के सामने गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की चुनौती

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अहमदाबाद, 17 जुलाई (भाषा) पूर्व पुलिसकर्मी और गुजरात में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मौजूदा प्रमुख सी. आर. पाटिल के सामने इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने की चुनौती है।

लोकसभा सदस्य पाटिल ‘माइक्रो मैनेजमेंट’ कौशल के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भाजपा को 2020 में गुजरात की आठ विधानसभा सीट के लिए महत्वपूर्ण उपचुनावों और पिछले साल राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय निकाय चुनावों में जीत दिलाई थी।

नगर निकाय और स्थानीय निकाय चुनावों में पाटिल का बहुचर्चित ‘नो रिपीट’ फॉर्मूला आजमाया गया, जिसमें पार्टी ने पार्षदों या पंचायत सदस्यों के रूप में लगातार तीन कार्यकाल पूरा करने वालों को टिकट देने से इनकार कर दिया।

प्रदेश भाजपा के मीडिया समन्वयक जुबिन अशरा ने कहा कि पाटिल का मुख्य जोर ‘पन्ना समितियों’ के माध्यम से निचले स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है।

नवसारी से सांसद बनने के बाद पाटिल ने इस विचार को बढ़ावा दिया। आम तौर पर, मतदाता सूची के प्रत्येक पन्ने में लगभग 25 मतदाता होते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उस पन्ने पर नाम वाले मतदाता मतदान के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करें, भाजपा उस पन्ने और पांच मतदाताओं के लिए एक ‘पन्ना प्रमुख’ या प्रभारी नियुक्त कर रही है।

मराठी मूल के पाटिल (67) गुजरात में ‘सीआर’ के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म पूर्ववर्ती बंबई राज्य से गुजरात और महाराष्ट्र के अलग राज्य बनने के पहले 1955 में जलगांव में हुआ था। किशोरावस्था के दौरान वह अपने परिवार के साथ गुजरात के सूरत शहर आ गए और उन्होंने वहां के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययन किया। पाटिल 1975 में एक कांस्टेबल के रूप में गुजरात पुलिस बल में शामिल हुए थे।

पाटिल को जुलाई 2020 में पाटीदार नेता जीतू वाघानी के स्थान पर भाजपा की गुजरात इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। भाजपा पिछले 27 वर्षों से गुजरात में सत्ता में है, लेकिन 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में वाघानी के नेतृत्व में उसका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली नहीं था क्योंकि पार्टी ने 99 सीट जीती थीं, जो 182 सदस्यीय सदन में बहुमत के निशान से सिर्फ सात सीट अधिक थीं।

राज्य में इस साल दिसंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है।

अशरा ने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पाटिल का ध्यान राज्यभर में पन्ना समितियां बनाने पर है। उन्होंने दावा किया, ‘‘इन समितियों का मुख्य कार्य केवल उस पृष्ठ के मतदाताओं की जिम्मेदारी लेना और यह सुनिश्चित करना है कि वे मतदान के दिन मतदान करने के लिए जाएं। पाटिल के पन्ना समिति बनाने के विचार को अन्य राज्यों में भी दोहराया गया है।’’

फरवरी 2021 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा की गुजरात इकाई को एक पत्र लिखा था और 15 लाख पन्ना समितियां बनाने के लिए इसकी प्रशंसा की थी, जो प्रधानमंत्री के अनुसार, लगभग 2.25 करोड़ मतदाताओं से जुड़ने में पार्टी की मदद करेगी।

बहरहाल, कांग्रेस की गुजरात इकाई के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि यह ‘हास्यास्पद’ है कि पाटिल राज्य की सभी 182 सीट जीतने का सपना देख रहे थे। उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा ने 150 सीट जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 100 भी नहीं जीत पाई।

उन्होंने दावा किया, ‘‘वे कार्यकर्ताओं और पन्ना समितियों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस हमेशा आम लोगों के साथ रहेगी जो हमें इस बार 125 से अधिक सीट देकर विजयी बनाएंगे।’’

भाषा आशीष देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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