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Monday, 23 March, 2026
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हत्यारोपी की किशोरावस्था के मुद्दे को लेकर नये सिरे से पड़ताल का न्यायालय का निर्देश

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नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि हरियाणा के गुरुग्राम जिले के एक निजी स्कूल में वर्ष 2017 में सात-वर्षीय बच्चे की हत्या के आरोपी से नए सिरे से पूछताछ की जानी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अपराध के लिए उसके खिलाफ एक वयस्क के तौर पर मुकदमा चलाया जाए या नहीं।

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने मृतक बच्चे के पिता की ओर से दाखिल अपीलों को खारिज कर दिया, जिनमें 11 अक्टूबर, 2018 के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने केंद्र और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को ऐसे मामलों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने के लिए भी कहा।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि बच्चे की हत्या के आरोपी 16 वर्षीय छात्र को मुकदमे के दौरान वयस्क माना जाएगा।

पीड़ित परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने कहा है कि आरोपी को वयस्क के रूप में पेश करने के लिए निचली अदालत द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है और इस मामले में कोई नया फैसला लेने के लिए इसे वापस किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया जाना चाहिये।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप पत्र में कहा था कि किशोर ने कथित तौर पर परीक्षाएं स्थगित कराने और निर्धारित अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) रद्द कराने के लिए छात्र की हत्या की थी।

गौरतलब है कि आठ सितंबर, 2017 को गुरुग्राम के भोंडसी इलाके में स्थित स्कूल के शौचालय में छात्र का शव मिला था, जिसका गला कटा हुआ था।

इससे पहले, अदालत ने मीडिया को इस मामले में 16 वर्षीय किशोर के नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था और इसके बजाय काल्पनिक नाम का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने सात वर्षीय पीड़ित का नाम ”प्रिंस” रखा था और किशोर आरोपी का नाम ”भोलू” जबकि स्कूल का नाम ”विद्यालय” रखा गया था।

इससे पहले जांच एजेंसी ने स्कूल बस के चालक अशोक कुमार को यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी थी कि अपराध में उसकी संलिप्तता को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है। गुड़गांव पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने निर्मम हत्या को लेकर राष्ट्रव्यापी रोष फैलने के बाद 22 सितंबर, 2017 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश

जोहेब

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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