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Thursday, 19 March, 2026
होमदेश'बाल यौन उत्पीड़न मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालतों को मुआवजा अर्जी का इंतजार नहीं करना चाहिए'

‘बाल यौन उत्पीड़न मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालतों को मुआवजा अर्जी का इंतजार नहीं करना चाहिए’

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नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि बाल यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालतों को अंतरिम मुआवजा प्रदान करने के लिए पीड़ित की ओर से अर्जी का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है और इस बाबत जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने विशेष अदालतों को यह भी निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई शुरू होने पर पीड़ितों को दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना के तहत आवेदन दाखिल करने के उनके अधिकार के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।

उच्च न्यायालय ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के नियम 9 (1) का हवाला दिया, जिसमें विशेष अदालतों को अंतरिम मुआवजा राशि के लिए आदेश जारी करने का अधिकार है।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि नियमानुसार विशेष अदालत स्वयं या आवेदन पर अंतरिम मुआवजे के लिए आदेश पारित कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे मुताबिक, विशेष अदालत को अंतरिम मुआवजा प्रदान करने के लिए बाल पीड़ित की ओर से अर्जी का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है और इस बाबत जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए।’’

अदालत का यह फैसला एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में तीन लोगों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है।

दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की ओर से पेश अधिवक्ता अजय वर्मा ने अदालत से विशेष अदालतों को पीड़ितों को लंबित मामलों में मुआवजा योजना के तहत आवेदन करने के उनके अधिकार के बारे में सूचित करने का निर्देश देने का आग्रह किया, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने उक्त आदेश दिया।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर तय की।

भाषा

शफीक पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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