बेंगलुरू, छह जुलाई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायपालिका पर ‘‘हताशापूर्ण हमला’’ करने का सत्तारूढ़ दल भाजपा पर आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी (कांग्रेस) प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिख रही है और ‘‘सुनियोजित’’ हमलों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने की मांग कर रही है।
इसे ‘व्यथित करने वाला मुद्दा’ बताते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, ‘जब विमर्श सत्तारूढ़ पार्टी की पसंद का नहीं होता, न्यायपालिका पर जानबूझकर, सुनियोजित, समन्वित हमला किया जाता है।’
सिंघवी ने आरोप लगाया, ‘न्यायाधीशों पर हमले केवल औचक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि हमले स्पष्ट रूप से संगठित और संस्थागत हैं। इसमें निरंतर ट्रोल किया जाता है, जिसका मकसद भाजपा नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा विस्तारित, प्रोत्साहित तथा समर्थित होता है।’
उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस तरह के अभियानों के पीछे मुख्य उद्देश्य ‘न्यायपालिका का मनोबल गिराना, दबाव बनाना और उसे आतंकित करना’ होता है।
सिंघवी ने कहा, ‘हम इस मामले को शांत नहीं होने देंगे। हम इस पर काम करने जा रहे हैं और भाजपा को उसके पूर्ण पाखंड के लिए, संवैधानिक शासन के संस्थानों को नष्ट करने के लिए, हमारे लोकतंत्र के स्तंभों को नष्ट करने के लिए बेनकाब करने जा रहे हैं। हम प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं, और न्यायिक प्रणाली तथा भारत के उच्चतम न्यायालय पर इन सुनियोजित हमलों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने की मांग कर रहे हैं।’
राज्यसभा सदस्य ने उदयपुर हिंसा को लेकर भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा के बारे में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बाद न्यायपालिका और शीर्ष न्यायालय पर हमला किए जाने का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के बारे में फर्जी खबरें गढ़ने और उन्हें फैलाने के लिए ट्रोल की एक संगठित सेना को तैनात किया गया है जिसने फर्जी और विकृत तस्वीरों के साथ कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने की भी कोशिश की।
भाजपा पर हमला बोलते हुए सिंघवी ने पूछा, ”एक अरब आवाज वाले देश में भाजपा कितने लोगों को चुप कराने की कोशिश करेगी? संविधान के आधार पर बने देश में भाजपा सिर्फ सत्ता में रहने के लिए कितनी संस्थाओं को तोड़ेगी? भाजपा की पूर्ण प्रशासनिक अक्षमता और विफलता के परिणाम का सामना कर रहे देश में भाजपा कब तक विभाजनकारी दुष्प्रचार के पीछे छिपेगी?
उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच पी संदेश की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह स्थानांतरण के दबाव और धमकियों का सामना कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने ‘सत्ता को सच्चाई दिखा दी थी’।
सिंघवी ने कहा, ‘… अगर मौजूदा न्यायाधीशों के साथ ऐसा हो सकता है, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि राजनीतिक विरोधियों, सामाजिक सक्रियतावादियों और आम लोगों के साथ क्या हो सकता है।’
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने देवी काली को धूम्रपान करते और एलजीबीटीक्यू का झंडा पकड़े दिखाने वाले वृत्तचित्र का समर्थन किया था, सिंघवी ने कहा, ‘ लोगों की उन भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने से पहले बहुत सावधान रहना चाहिए, जो प्रतीकों, धर्म और संस्कृति में परिलक्षित होती हैं। और इस तरह के दृश्य दिखाने वालों को कई बार सोचना चाहिए।’
उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि हमारे धर्म के प्रतीकों और तत्वों में संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए, तथा हमारी संस्कृति के हृदय और आत्मा को कहीं भी किसी के द्वारा महत्वहीन नहीं किया जा सकता।’
भाषा नेत्रपाल सुभाष
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