scorecardresearch
Saturday, 14 March, 2026
होमदेश' स्त्री दर्पण' के डिजिटल संस्करण का ऑनलाइन लोकार्पण

‘ स्त्री दर्पण’ के डिजिटल संस्करण का ऑनलाइन लोकार्पण

Text Size:

नई दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) पत्रिका ‘स्त्री दर्पण’ के डिजिटल संस्करण का शुक्रवार को ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। करीब सौ वर्ष पहले इलाहाबाद से इस पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ था लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से इसमें व्यावधान पैदा हो गया।

इस संबंध में जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, पत्रिका ‘स्त्री दर्पण’ इस बात का सबूत है कि आजादी की लड़ाई में नेहरू खानदान की स्त्रियों ने भी पत्रकारिता के माध्यम से स्वतंत्रता की चिंगारी फैलाई थी। मोतीलाल नेहरू के चचेरे भाई बृजलाल नेहरू की बहू रामेश्वरी नेहरू ने 1909 में इलाहाबाद से इस पत्रिका को शुरू किया था। इस पत्रिका से देश के प्रथम प्रधानंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी जुड़ी थी।

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका मृदुला गर्ग ने ‘स्त्री दर्पण’ मंच पर इस पत्रिका का ऑनलाइन लोकार्पण किया। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखिका सुधा अरोड़ा , आलोचक रोहिणी अग्रवाल, सुधा सिंह और पत्रिका की संपादक एवम् वरिष्ठ कवयित्री सविता सिंह भी मौजूद थीं।

यह अंक हाल ही में बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्मानित लेखिका गीतांजलि श्री पर केंद्रित है।

स्त्री दर्पण पत्रिका 1929 तक निकलती रही और स्त्रियों की समस्याओं को इसमें प्रमुखता से उठाया गया। उस पत्रिका को महिलाएं ही चलाती थीं।

श्रीमती सविता सिंह ने ‘भाषा’ को बताया कि इस पत्रिका की लंबी और महान विरासत है। यह महावीर प्रसाद द्विवेदी की ‘सरस्वती’, विद्यार्थी जी के ‘प्रताप’ , प्रेमचन्द के’ हंस ‘ और महादेव प्रसाद सेठ के ‘मतवाला ‘की तरह महत्वपूर्ण है लेकिन हिंदी साहित्य में इसकी उतनी चर्चा नहीं हुई। हम लोग इसे स्त्री विमर्श साहित्य पर केंद्रित करेंगे ताकि हम सबकी आवाज़ सुनी जा सके।

यह पत्रिका त्रैमासिक होगी और स्त्री दर्पण की वेबसाइट पर अपलोड होगी। गौरतलब है कि फेसबुक पर स्त्री दर्पण को दुनिया के 54 देशों में और देश के 100 शहरों में देखा पढ़ा जा रहा है।

भाषा पवनेश नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments