नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) सरकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कामकाज को व्यवस्थित, सुगम, पारदर्शी एवं वहनीय बनाने के लिये जल्द ही ‘आदर्श उपनियम’ (बाइलॉज) लायेगी। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी ।
सूत्रों ने बताया कि अभी देश में 63 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियां हैं और आने वाले चार-पांच वर्षों में सरकार इनकी संख्या बढ़ाकर तीन लाख करना चाहती है। ‘‘इसके लिये देश में ग्राम पंचायतों पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।’’
सूत्रों ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कामकाज को व्यवस्थित करने के लिये एक ऐसे सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी जो इनकी लेखा-प्रणाली (अकाउंटिंग) को ठीक से चला सके।
इस दिशा में देशव्यापी स्तर पर एक सॉफ्टवेयर तैयार किया जायेगा जो सभी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि पैक्स के तहत भविष्य में पीएफओ, दूग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन संस्थान, नल से जलापूर्ति करने से संबंधित जल समितियां आदि को जोड़ा जायेगा।
सूत्रों ने बताया कि अभी इससे संबंधित उपनियमों में यह प्रावधान नहीं है।
उन्होंने बताया कि ऐसे में जल्द ही पीएसीएस पर ‘मॉडल उपनियम’ आएंगे।
उन्होंने कहा कि पैक्स को पारदर्शी तरीके से चलाना जरूरी है, ऐसे में उम्मीद है कि सभी राज्य उपनियमों को अपनायेंगे।
सूत्रों ने बताया कि इसके तहत साझा लेखा प्रणाली और साझा सॉफ्टवेयर होगा।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में पैक्स एक तरह से काम करेगा और उन्हें वहनीय बनने के लिये 20 से अधिक विकल्प मिलेंगे ।
सूत्रों ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय सहकारिता विश्वविद्यालय भी स्थापित करना चाहती है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए 2,516 करोड़ रुपये के खर्च की बुधवार को मंजूरी दी है।
इस परियोजना में कुल 2,516 करोड़ रुपये का बजट परिव्यय होगा जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 1,528 करोड़ रुपये की होगी। इसके तहत पांच साल की अवधि में लगभग 63,000 कार्यरत पैक्स के कंप्यूटरीकरण का प्रस्ताव है।
देश में अधिकांश पैक्स को अब तक कंप्यूटरीकृत नहीं किया गया है और वे अभी भी हस्तचालित तरीके से कार्य कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप उनके संचालन में क्षमता और भरोसे की कमी दिखाई देती है।
भाषा दीपक दीपक अजय
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