मैसुरु, 20 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को यहां चामुंडी पहाड़ियों पर पहुंचे और मैसूरु की देवी चामुंडेश्वरी और उसके राजघरानों की पूजा की।
प्रधानमंत्री के साथ राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी भी शामिल थे।
मोदी ने मंदिर में चामुंडेश्वरी की पूजा करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की, जिन्हें ‘नाडा देवता’ (राज्य देवता) भी माना जाता है। इस अवसर पर पुजारी संस्कृत में श्लोकों का पाठ कर रहे थे।
‘चामुंडी’ या ‘दुर्गा’ ‘शक्ति’ का उग्र रूप है। चामुंडा देवी ने ‘चंड’, ‘मुंड’ और ‘महिषासुर’ का वध किया था।
मंदिर और शहर से जाने वाले मार्ग को प्रधानमंत्री की यात्रा के उद्देश्य से रोशनी और फूलों से सजाया गया था और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
मोदी ने पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर की ‘प्रदक्षिणा’ की।
अधिकारियों ने कहा कि मंदिर एक हज़ार साल से अधिक समय से पुराना है। यह शुरू में एक छोटा मंदिर था और सदियों तक पूजा होने के बाद एक महत्वपूर्ण पूजा स्थल बन गया है।
इससे पहले, मोदी ने ‘वेद पाठशाला’ भवन मंदिर को समर्पित किया और सुत्तूर मठ में योग और भक्ति पर टिप्पणियों का विमोचन किया।
मोदी ने उत्तर में काशी से लेकर दक्षिण काशी-नंजनागुडु तक के मंदिरों और मठों के योगदान को याद किया,जिन्होंने गुलामी के समय में भी भारत के ज्ञान का प्रसार किया। मोदी ने कर्नाटक के कुछ प्रमुख मठों का उल्लेख करते हुए सदियों से इस प्रयास में उनके योगदान को उजागर करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि भारत के संतों और मठों ने आस्था से अधिक सेवा को प्रमुखता दी है।
समानता, लोकतंत्र और शिक्षा के संबंध में 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर के मूल्यों और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मैग्ना कार्टा से पहले उनके वचनों ने सोचा नहीं था कि समाज को कैसे देखा जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कन्नड़, तमिल और तेलुगु के साथ-साथ अन्य भाषाओं में भी संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भाषा फाल्गुनी माधव
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