नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि नीति निर्माताओं को सुरक्षित एवं प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का लाभ उठाने के प्रयासों को बढ़ावा देते हुए योग को समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पहलों से जोड़ने पर विचार करना चाहिए।
दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि नियमित योग अभ्यास से सभी आयु और आय वर्ग के लोगों को पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करने में मदद मिलेगी, जिससे यह गैर-संचारी रोगों के नियंत्रण एवं रोकथाम में अत्यधिक असरदार और किफायती तरीका बनकर उभरेगा।
सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि कोविड-19 से निपटने के दौरान योग ने सभी देशों के लाखों लोगों की स्वस्थ रहने में मदद की, जिससे यह पता चलता है कि योग पूरी मानवता के लिए है, जो इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की थीम भी है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्रियों ने स्कूलों में व्यापक स्वास्थ्य कार्यक्रम का क्रियान्वयन करके शारीरिक सक्रियता और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी से निपटने के बीच नीति निर्माताओं को योग को रोकथाम वाली स्वास्थ्य रणनीतियों, खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित रणनीतियों से जोड़ने पर विचार करना चाहिए, जो आगामी वर्षों में एक अहम प्राथमिकता है।’’
गौरतलब है कि मार्च में भारत सरकार ने जामनगर में डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (जीसीटीएम) स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
जीसीटीएम का उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य एवं समग्र विकास की दिशा में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के योगदान पर अध्ययन करना, उससे जुड़े आंकड़े जुटाना और प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
भाषा गोला पारुल
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