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Tuesday, 17 March, 2026
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कोकिंग कोयले की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग

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नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) भारतीय इस्पात संघ (आईएसए) ने कोकिंग कोयले की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इसकी कीमत तीन गुना होकर 450 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है।

आईएसए के महासचिव आलोक सहाय ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, ‘‘कोकिंग कोयले की कीमतें उद्योग और उत्पादन लागत को प्रभावित कर रही हैं, जिसका असर इस्पात की कीमतों पर भी पड़ रहा है।’’

सहाय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एक साल पहले कोकिंग कोयले की कीमत 120 से 130 डॉलर प्रति टन के बीच हुआ करती थी।

उन्होंने कहा कि मार्च, 2022 में कोकिंग कोयला 670 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया था।

उद्योग विशेषज्ञ ने कहा कि मौजूदा मूल्य सीमा पर केवल इस्पात विनिर्माण में कोकिंग कोयले की लागत लगभग 28,000 रुपये से 30,000 रुपये प्रति टन है, जो उत्पादन लागत का लगभग 40-45 प्रतिशत है। इसके अलावा लौह अयस्क, फेरो अलॉय, लॉजिस्टिक्स, ईंधन लागत और अन्य निश्चित लागत आती हैं।

सहाय ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। उसी तरह से इस्पात की कीमतें भी कोकिंग कोयले की बढ़ती दरों के अनुरूप बढ़ती हैं।

आईएसए फरवरी, 2022 से सरकार को कोकिंग कोयले की कीमतों पर ध्यान देने के लिए कह रहा है। संगठन का मानना है कि ’’कीमत पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है ताकि इस्पात उत्पादन की लागत को कम किया जा सके।’’

कोकिंग कोयला और लौह अयस्क इस्पात विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले दो प्रमुख कच्चे माल हैं। जबकि लौह अयस्क घरेलू स्तर पर उपलब्ध है।

देश अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से अधिकांश आयात ऑस्ट्रेलिया से किया जाता है।

सहाय ने कहा कि आईएसए ने कोकिंग कोयले की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

भाषा रिया रिया अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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