इरोड (तमिलनाडु), 11 जून (भाषा) नाबालिग बच्ची को ‘ओवम’ (अंडाणु) दान करने के लिए मजबूर किए जाने के मामले की जांच के तहत शनिवार को तमिलनाडु के होसुर और आंध्र प्रदेश के तिरुपति के दो निजी अस्पतालों के पदाधिकारी पुलिस के समक्ष उपस्थित हुए।
मामले की जांच अधिकारी इरोड की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कंगेश्वरी द्वारा जारी सम्मनों के आधार पर दोनों अस्पतालों के पदाधिकारी उनके समक्ष उपस्थित हुए।
पुलिस ने कहा कि होसुर के एक निजी अस्पताल की मदद से नाबालिग लड़की को तिरुपति के एक अस्पताल ले जाया गया जहां उसके अंडाणु लिए गए।
पुलिस ने बताया कि दोनों अस्पतालों का प्रशासन जांच अधिकारियों को सभी जानकारी मुहैया करा कर जांच में सहयोग कर रहा है।
इस बीच पुलिस ने केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित एक अन्य ‘इनफर्टिलिटी क्लिनिक’ को भी सम्मन जारी किया है।
पुलिस ने बताया कि इरोड जिले के पेरुनदुरई के एक अस्पताल ने लड़की से उसके अंडाणु संग्रहित किए थे। लड़की अकसर अपनी मां और तीन अन्य लोगों के साथ अस्पताल आया करती थी। पुलिस ने बताया कि तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल के संपर्क वाले अस्पताल ने लड़की का नाम सुझाया था और उसे अंडाणु निकलवाने के लिए लेकर गया था।
पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से कहा है कि वह लड़की से अंडाणु लेने के सभी दस्तावेजों के साथ उसके समक्ष पेश हों।
पुलिस ने बताया कि जिले की एक इनफर्टिलिटी क्लिनिक के पदाधिकारी जांच के सिलसिले में शुक्रवार को पुलिस के समक्ष उपस्थित हुए थे।
भाषा अर्पणा प्रशांत
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