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Sunday, 29 March, 2026
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नीट-पीजी की विशेष काउंसिलिंग न कराने का सरकार का फैसला मनमाना नहीं : उच्चतम न्यायालय

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नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि नीट-पीजी-2021 में ऑल इंडिया कोटे के लिए काउंसिलिंग का विशेष स्ट्रे राउंड नहीं करने का केंद्र और मेडिकल काउंसलिंग समिति (एमसीसी) का फैसला ‘चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य के हित में’ है । न्यायालय ने यह कहते हुए 1456 सीट भरने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे जन स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।

पीठ ने कहा, ‘‘ काउंसिलिंग का विशेष स्ट्रे राउंड नहीं कराने का सरकार और मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) का फैसला चिकित्सा शिक्षा और जन स्वास्थ्य के हित में है। चिकित्सा शिक्षा के गुण और/या गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसका आखिरकार जनस्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। ’’

पीठ ने कहा, ‘‘जब भारत सरकार और एमसीसी ने काउंसिलिंग का कोई भी विशेष चरण न कराने का फैसला जब सोच समझकर लिया है,तो इसे मनमाना नहीं माना जा सकता।’’

न्यायालय ने कहा कि प्रवेश की प्रक्रिया और वो भी चिकित्सा शिक्षा में यह प्रक्रिया अंतहीन नहीं हो सकती है और यह एक खास समय पर समाप्त हो जानी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि समय सारिणी / निर्धारित प्रवेश कार्यक्रम का पालन तो करना ही होगी, अन्यथा इससे चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

पीठ ने कहा कि एमसीसी और केंद्र सरकार को प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने की समय सारिणी का का पालन करना है जब नीटी-पीजी-2021 का वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया पहले से ही निर्धारित समय से पीछे चल रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘जब भारत सरकार और एमसीसी ने और विशेष स्ट्रे राउंड काउंसिलिंग न कराने का फैसला जब सोच समझकर लिया है,तो इसे मनमाना नहीं माना जा सकता।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्र अकादमिक सत्र के करीब एक साल और काउंसिलिंग के आठ से नौ चरणों के बाद उन खाली सीटों पर दाखिले के लिए प्रार्थना नहीं कर सकते, जिनमें से ज्यादा नॉन-क्लिनिकल हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘इस तथ्य के अलावा कि सात मई, 2022 को काउंसलिंग का आखिरी दौर समाप्त हो गया और पूरी सॉफ्टवेयर प्रणाली बंद कर दी गयी है एवं सुरक्षा जमाराशि पात्र उम्मीदवारों को लौटायी जा चुकी है, यह देखने वाली बात है कि नीट-पीजी-2022 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, नीट-पीजी-2022 का परिणाम एक जून, 2022 को घोषित किया जा चुका है और समय सारिणी के हिसाब से काउंसलिंग प्रक्रिया जुलाई, 2022 में शुरू होने जा रही है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे में काउंसलिंग का एक और विशेष स्ट्रे राउंड यदि कराया जाता है, जैसा कि अनुरोध किया गया है, तो उस स्थिति में नीट-पीजी-2022 की प्रवेश प्रकिया प्रभावित हो सकती है।

शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि नीट-पीजी-2021 में अखिल भारतीय कोटा के लिए विशेष ‘स्ट्रे राउन्ड’ की काउंसलिंग की सीमा होनी चाहिए और शिक्षा तथा लोगों के स्वास्थ्य से समझौता करके छात्रों को दाखिला नहीं दिया जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बुधवार को शीर्ष न्यायालय को बताया था कि उसने नीट-पीजी-21 के लिए चार चरणों की ऑनलाइन काउंसलिंग की है और वह विशेष काउंसलिंग कराकर 1,456 सीट को नहीं भर सकता है क्योंकि सॉफ्टवेयर बंद हो गया है।

उच्चतम न्यायालय ने नीट-पीजी-21 में 1450 से अधिक सीटें खाली रहने पर बुधवार को मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) को फटकार लगाई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसने न केवल उम्मीदवारों को मुश्किल में डाला है बल्कि इससे डॉक्टरों की भी कमी होगी।

नीट-पीजी 2021-22 परीक्षा में बैठने वाले और अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) काउंसलिंग एवं राज्य कोटा काउंसलिंग के पहले और दूसरे चरण में भाग लेने वाले डॉक्टरों ने ये याचिकाएं दायर की थीं।

वकील तन्वी दुबे के जरिए डॉ. आस्था गोयल और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं में से एक में कहा गया है कि 18 अप्रैल को एक अधिसूचना में एमसीसी ने घोषणा की थी कि यूजी काउंसलिंग में 323 खाली सीट हैं और ये मूल्यवान सीट बर्बाद न हों, इसके लिए विशेष काउंसलिंग कराई जाएगी।

याचिका में कहा गया कि यहां यह उल्लेख करना उचित है कि एमसीसी पहले भी ऐसी प्रक्रिया का पालन करता रहा है जहां सीट बर्बाद न जाने के उद्देश्य से यूजी और पीजी के लिए विशेष काउंसलिंग कराई जाती है। हालांकि, इस साल यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

भाषा राजकुमार उमा

उमा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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