नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को ट्विटर और यूट्यूब को अपने-अपने सोशल मीडिया मंच से एक इत्र ब्रांड के उन विज्ञापनों के वीडियो हटाने को कहा, जिसने ‘‘सामूहिक बलात्कार को बढ़ावा देने वाली संस्कृति’’ को लेकर आक्रोश पैदा किया है।
ट्विटर और यूट्यूब को भेजे पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि ये वीडियो “शालीनता और नैतिकता के हित में महिलाओं के चित्रण के प्रति हानिकारक” हैं और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) का उल्लंघन हैं।
इत्र ब्रांड लेयर शॉट के विज्ञापन से जुड़े वीडियो पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक बड़े वर्ग ने आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह विज्ञापन महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को बढ़ावा देता है।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर एक इत्र ब्रांड का अनुचित और अपमानजनक विज्ञापन प्रसारित हो रहा है। मंत्रालय ने ट्विटर और यूट्यूब से इस विज्ञापन से जुड़े सभी वीडियो को तुरंत हटाने के लिए कहा है।”
ट्विटर और यूट्यूब को भेजे पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने भी संबंधित वीडियो को अपने दिशा-निर्देशों के खिलाफ पाया है। मंत्रालय के मुताबिक, एएससीआई ने विज्ञापनदाता को संबंधित विज्ञापन को तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया है।
दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर इस विज्ञापन को हटाए जाने की मांग की है।
आयोग ने शनिवार को कहा कि विज्ञापन से ‘‘सामूहिक बलात्कार की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है’’ और मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस भी जारी किया गया है।
ठाकुर को लिखे अपने पत्र में डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने के लिए मंत्रालय से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मालीवाल ने कहा, ‘‘यह कैसी रचनात्मक प्रक्रिया है…जो सामूहिक बलात्कार की संस्कृति को प्रोत्साहित करती है? प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए, ऐसे विज्ञापनों को बंद कर दिया जाना चाहिए।’’
मालीवाल ने कहा कि इस कंपनी पर सबसे कठोर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में और समय बर्बाद किए बिना दिल्ली पुलिस और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
रिषिता नाम की महिला ने एक ट्वीट में सवाल किया, ‘‘ इस तरह के विज्ञापनों को कैसे मंजूरी मिल जाती है।’’
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
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