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Friday, 1 May, 2026
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भारतीय शिक्षक शिक्षा प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल कर रहें : ब्रिटिश अध्ययन

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(अदिति खन्ना)

लदंन, 26 मई (भाषा) महामारी उपरांत किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि भारतीय शिक्षकों ने कोविड-19 महामारी के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ने और उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए शिक्षा प्रौद्योगियों के इस्तेमाल में अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया है।

इस अध्ययन को बृहस्पतिवार को जारी किया गया। इसमें कहा गया कि भारतीय शिक्षक इस कुशलता की वजह से स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद पढ़ाई के अंतर को पाट सकते हैं।

यह अनुसंधान ‘‘ऑनलाइन वातावरण में प्रभावी आकलन और प्रगति निगरानी’’ शीर्षक से छह देशों भारत, बांग्लादेश, नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपीन और दक्षिण अफ्रीका में किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य उन तथ्यों पर प्रकाश डालना था कि कैसे विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी में सुधार की जरूरत है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि कोई विद्यार्थी पीछे न छूट जाए।

यह अध्ययन लंदन मुख्यालय से परिचालित डिजिटल मीडिया मंच टी4 एजुकेशन ने वैश्विक अनुसंधान समन्य इडटेक हब के साथ मिलकर किया है। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि शिक्षकों की सहायता के लिए शिक्षा प्रौघोगिकी की जरूरत है, जो महामारी के दौरान विद्यार्थियों के पढ़ाई और उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए नवोन्मेषी तकनीकों पर आश्रित हैं।

एडटेक हब की कार्यकारी निदेशक ने वर्ना लालबिहारी ने कहा, ‘‘ दीर्घकालिक आपात वातावरण में विद्यार्थियों की पढ़ाई को जारी रखने की बड़ी चुनौती भारत और दुनिया के शिक्षकों के सामने आई जिसका अध्ययन किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोई प्रौद्योगिकी नहीं है जो पढ़ाने की कला का स्थान ले सके। महामारी से पहले यह सच्चाई थी और गत दो साल में यह गहराई से रेखांकित हुआ है। हम क्या कर सकते हैं। हालांकि, इस कला को शिक्षकों को तथ्य का आधार, प्रभावी हथियार और आंकलन प्रणाली मुहैया कराकर बढ़ाया जा सकता है, जो महामारी के दौरान निम्न-मध्यम आय वाले देशों में पढ़ाई के नुकसान को रोकने के लिए जरूरी है। इस रिपोर्ट से ली गई सबक से हम अगली बार संकट में स्कूलों को बंद करने की मजबूरी के दौरान उचित तरीके से विद्यार्थियों की निगरानी कर सकेंगे।’’

अध्ययन में खुलासा हुआ कि कैसे शिक्षा प्रौद्योगिकी जैसे मुफ्त में इस्तेमाल करने के लिए एक से अधिक विकल्पों वालों प्रश्नों जैसे गूगल फार्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया और इसे लागू करना आसान था क्योंकि भारत में डिजिटल पहुंच लॉकडाउन के दौरान अच्छी थी। अध्ययन के मुताबिक विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़े रखने में इसका सकारात्मक असर हुआ। हालांकि, विद्यार्थियों के पास सीमित संख्या में डिजिटल उपकरण और खराब कनेक्टिविटी ने अकसर चुनौती पेश की खासतौर पर देश के ग्रामीण हिस्सों में।

केंद्रित समूह के प्रभागियों ने बताया कि एक ही उपकरण से कितने छात्र जुड़े हैं और कैसे वे इनका इस्तेमाल केवल शाम या सप्ताहांत में कर सकते हैं, जबकि परिवार के छोटे भाई-बहन तक इनकी पहुंच नहीं हो पाती थी।

ऐसी मुश्किलों से निपटने के लिए शिक्षकों ने नवोन्मेषी तरीकों को खोजा। उदाहरण के लिए शिक्षक अकसर व्हाट्सऐप के जरिये ध्वनि संदेश से निर्देश और तीसरे पक्ष के प्रश्नवाली लिंक छात्रों को भेजते थे।

हालांकि, कई विद्यार्थियों की पहुंच साझा उपकरणों तक भी नहीं होती थी ऐसे में शिक्षकों को उनके कार्य को जमा कराने के लिए समुदाय के अन्य लोगों पर निर्भर होना पड़ता था।

शिक्षकों ने उन विद्यार्थियों की भी मदद के लिए कदम उठाया जो मोबाइल डाटा की कीमत को लेकर संघर्ष कर रहे थे। शिक्षकों ने यहां तक अपने उपकरणों और डाटा से उनकी मदद व्यक्तिगत तौर पर की।

शिक्षकों ने विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी फोन का इस्तेमाल करना सिखाया।

अध्ययन में कहा गया कि भारतीय शिक्षकों ने महामारी की वजह से बच्चों में पैदा हुए तनाव और दहशत को भी दूर करने में मदद की।

भाषा

धीरज उमा

उमा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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