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Friday, 13 March, 2026
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राजकोषीय घाटे पर ‘नियंत्रण’ के लिए सरकार की अतिरिक्त कर्ज लेने की योजना नहीं: सूत्र

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नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) सरकार पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य वस्तुओं पर शुल्कों में कटौती के कारण राजस्व में होने वाले नुकसान के बावजूद चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त कर्ज लेने की योजना नहीं बना रही है और इसके लिये निर्धारित लक्ष्य पर कायम रहेगी। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

बढ़ती महंगाई को काबू में लाने और लोगों को राहत देने के लिये पिछले सप्ताह पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में रिकॉर्ड आठ रुपये और डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर की कटौती की गयी। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब नौ करोड़ लाभार्थियों को एलपीजी पर 200 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी दी गयी।

साथ ही चालू वित्त वर्ष में बजट में निर्धारित 1.05 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के अलावा सरकार ने उर्वरकों की कमी के चलते कीमतों में तेजी से किसानों को राहत देने के लिये 1.10 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं।

इससे यह आशंका थी कि सरकार राजस्व में कमी की भरपाई के लिये अतिरिक्त उधारी लेगी।

हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार का इस समय शुल्क घटाये जाने के कारण राजस्व में हुए नुकसान को पूरा करने के लिये अतिरिक्त कर्ज लेने का कोई इरादा नहीं है। सरकार कर्ज को लेकर निर्धारित योजना पर कायम रहेगी।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में बाजार से 14.31 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का अनुमान रखा है। इसमें से 8.45 लाख करोड़ रुपये पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में जुटाये जाने का अनुमान है।

सरकार ने उधारी कार्यक्रम के आधार पर चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा है।

भाषा

रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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