बेंगलुरु, 25 मई (भाषा) कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा नेतृत्व द्वारा उनके बेटे एवं पार्टी उपाध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र को टिकट देने से इनकार करने के एक दिन बाद बुधवार को उन्हें (विजयेंद्र को) पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दिये जाने के संकेत दिये।
इस बीच, कांग्रेस पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए, मैसूर में विजयेंद्र ने कहा कि येदियुरप्पा ने कभी भी उन्हें विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) या मंत्री बनाने की इच्छा व्यक्त नहीं की और पार्टी नेतृत्व यह तय करेगा कि उनका उपयोग कैसे किया जाए।
उन्होंने कहा, “मुझे ज्यादा चिंता नहीं है क्योंकि राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व इस पर फैसला करेंगे कि मुझे कौनसी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।” विजयेंद्र ने इन बातों को खारिज कर दिया कि उनके पिता को पार्टी में किनारे किया जा रहा है।
विजयेंद्र ने कहा, “येदियुरप्पा और भाजपा एक हैं। येदियुरप्पा के बिना भाजपा नहीं है और भाजपा के बिना येदियुरप्पा नहीं है, क्योंकि उन्होंने 30-40 साल में पार्टी खड़ी की है और एक परिवार की तरह इसकी देखभाल की है।”
तीन जून को सात सीटों के लिए होने वाले विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों के लिए प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेंद्र को टिकट देने की प्रदेश इकाई की सिफारिश को नज़रअंदाज़ करते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मंगलवार को चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। चुनाव के लिए नामांकन दायर करने की समय सीमा खत्म होने से कुछ घंटों पहले यह घोषणा की गई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बेटे का नाम शामिल नहीं था।
इस कदम को राजनीतिक हलकों में येदियुरप्पा के लिए झटका माना जा रहा है।
येदियुरप्पा ने बुधवार को कहा, “विजयेंद्र को विधान परिषद का टिकट नहीं देने के खास मायने निकालने की जरूरत नहीं है। मुझे विश्वास है कि स्वाभाविक रूप से विजयेंद्र को भविष्य में बड़ा मौका मिलेगा। पार्टी क्षमतावान और वफादारों को कभी निराश नहीं करेगी।”
उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कर्नाटक में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को वापस सत्ता में लाने का लक्ष्य है और इस संबंध में सभी प्रयास ‘अभी से ही’ शुरू होंगे।
येदियुरप्पा ने कहा, “मुझे विश्वास है कि अगले चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा और वह सत्ता में वापस आएगी।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या विजयेंद्र को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी. एल. संतोष की वजह से टिकट नहीं मिला है, तो पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है, अनावश्यक रूप से मीडिया में ऐसी बातें कही जा रही हैं और इसका कोई मतलब नहीं है।’’ संतोष को येदियुरप्पा का विरोधी माना जाता है।
उन्होंने कहा कि विजयेंद्र को विभिन्न मौके मिल सकते हैं और वह अभी प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
येदियुरप्पा ने कहा, “उन्हें और बड़ा मौका दिया जा सकता है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा पर छोड़ दिया गया है। मुझे विश्वास है कि जल्द ही कुछ बदलाव हो सकते हैं और (उन्हें) और अधिक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।”
विजयेंद्र भी उन अटकलों का जवाब नहीं देना चाहते हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि उन्हें टिकट देने से इनकार करने में संतोष की भूमिका है।
उन्होंने कहा, “संतोष जी जैसे वरिष्ठ नेताओं का नाम अनावश्यक रूप से लाना गलत है।”
विजयेंद्र ने कल एक अपील जारी कर कहा था कि सत्ता और पद ही राजनीति में अंतिम उद्देश्य नहीं हैं।
उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों को पार्टी के निर्णय का पालन करने के लिए कहा था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने विजयेंद्र को टिकट नहीं देने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि वह उन्हें 2023 के विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाना चाहते हैं और चुनाव से पहले उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। संभव है उन्हें प्रदेश महासचिव बनाया जा सकता है।
इस तरह की खबरें हैं कि येदियुरप्पा अपने बेटे को एमएलसी बनाना चाहते हैं और फिर वह उन्हें बसवराज बोम्मई कैबिनेट में मंत्री बनाए जाने पर ज़ोर देंगे।
भाषा नोमान पवनेश
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