नयी दिल्ली, दो मई (भाषा) मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने एक ऐसे औषधीय अणु की खोज की है जो अग्न्याशय को इंसुलिन का स्राव करने में सक्षम बना सकता है और संभावित रूप से इसे मधुमेह के उपचार के लिए गोली या कैप्सूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
अनुसंधानकर्ताओं की टीम के अनुसार, इस अणु का नाम पीके-2 है और अनुसंधान का निष्कर्ष ‘जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री’ में प्रकाशित हुआ है।
स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज, आईआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर प्रोसेनजीत मंडल ने कहा, ‘मधुमेह के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली एक्सैनाटाइड और लिराग्लूटाइड जैसी मौजूदा दवाएं इंजेक्शन के रूप में दी जाती हैं और वे महंगी होती हैं तथा उनका प्रभाव अस्थिर होता है। हम ऐसी सरल दवाएं खोजना चाहते हैं जो टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के खिलाफ स्थिर, किफायती और प्रभावी हों।’
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि पीके-2 अणु को जठरांत्र तंत्र द्वारा तेजी से अवशोषित किया गया, जिसका अर्थ है कि इसे इंजेक्शन के बजाय गोली या कैप्सूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पीके-2 अग्न्याशय को इंसुलिन का स्राव करने में सक्षम बना सकता है और इस तरह यह मधुमेह के उपचार में कारगर साबित हो सकता है।
भाषा नेत्रपाल मनीषा
मनीषा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
