कोलकाता, 18 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय सचिव अनुपम हाजरा ने सोमवार को अंदरूनी कलह से प्रभावित पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई से कहा कि वह अपनी कमियों की पहचान करके पार्टी के भीतर चीजों को ठीक करे, अन्यथा राज्य में इसका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
आसनसोल लोकसभा क्षेत्र और बालीगंज विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद प्रदेश इकाई की आलोचना करने वाले हाजरा ने कहा कि ‘‘सबकुछ ठीक होने का दिखावा करने’’ के बजाय नेतृत्व को मुद्दों को हल करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
आसनसोल से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार एवं बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा भाजपा की अग्निमित्रा पॉल को तीन लाख से अधिक मतों से हराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के भीतर आंतरिक कलह सामने आई।
कोलकाता की बालीगंज सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने माकपा उम्मीदवार को 20,228 मतों के अंतर से हराया। वहां भाजपा उम्मीदवार को तीसरा स्थान मिला।
हाजरा ने कहा, ‘यदि समस्या पर चर्चा नहीं की गई तो आप अपनी गलतियों को कैसे सुधारेंगे? यदि आप आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं तो आपका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। यदि आप हमेशा कहते हैं कि सब ठीक है तो आप समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे? ‘
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व को सभी को साथ लेकर चलना चाहिए और तृणमूल कांग्रेस के ‘‘कुशासन’’ के खिलाफ एकजुट होकर काम करना चाहिए।
भाजपा सांसद सौमित्र खान ने सोमवार को कहा कि बंगाल इकाई ‘एक बीमारी से पीड़ित है और उसे दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) से दवा की सख्त जरूरत है।’
उन्होंने हाल ही में कहा था कि उपचुनाव में हार अपेक्षित थी क्योंकि प्रदेश इकाई का नेतृत्व ‘किसी भी राजनीतिक परिपक्वता से रहित अनुभवहीन नेताओं’ द्वारा किया जा रहा है।
इन बयानों पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि सभी को पार्टी के अनुशासन का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी को कोई शिकायत या सुझाव है, तो वह उसे सार्वजनिक करने के बजाय हमेशा पार्टी मंच पर रख सकता है।”
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आंतरिक मतभेद सुलझाने में विफल रहने पर भाजपा की प्रदेश इकाई का मजाक उड़ाया।
तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘बंगाल भाजपा इकाई अपने मतभेदों को नहीं सुलझा सकती है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने का सपना देख रही है। उन्हें पहले अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।’
भाषा नेत्रपाल वैभव अमित
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