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Wednesday, 29 April, 2026
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अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत, प्रत्यर्पण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

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नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय केंद्र एवं अन्य को रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी नागरिकों समेत अवैध प्रवासियों का पता लगाने, उन्हें हिरासत में लेने एवं प्रत्यर्पित करने का निर्देश देने के लिए अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर बृहस्पतिवार को राजी हो गया।

हालांकि उसने इस बात पर निराशा प्रकट की कि उसे राजनीतिक कार्यपालिका के कामकाज से जुड़े विषयों पर सुनवाई क्यों करनी चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय से कहा कि वह उनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी बशर्ते कि केंद्र ने अपने सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता के मार्फत जवाब दाखिल किया हो।

शुरू में ही उपाध्याय ने कहा कि यह याचिका अवैध प्रवासियों का पता लगाने, उन्हें अभिरक्षा में लेने एवं प्रत्यर्पित करने का अनुरोध करती है जिनकी संख्या एक आकलन के मुताबिक, पांच करोड़ है और वे नागरिकों की आजीविका के अधिकारों को छीन रहे हैं।

न्यायमूर्ति रमण, न्यायमूर्ति कृष्णा मुरारी एवं न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा, ‘‘ मुझे रोजाना आपके मामले की सुनवाई करनी होगी। बिल्कुल नजर आ रही समस्याएं …सभी समस्याएं, संसद, सदस्यों का मुद्दा, नामांकन का मुद्दा, चुनाव सुधार। ये सभी राजनीतिक मुद्दे हैं। आप सरकार के पास जाइए एवं आप उससे लड़कर समाधान ढूंढिए।’’

उपाध्याय ने कहा कि कुछ राज्य सरकारें इन अवैध प्रवासियों को मुफ्त आवास प्रदान कर रही हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ मैं सहमत हूं कि आपके सभी मामलों को लिया जाना चाहिए और जिन आदेशों का आपने अनुरोध किया है, वे पारित किए जाएं। मुझे खेद है, मैं इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। लेकिन मुद्दा यह है कि वे (निर्वाचित प्रतिनिधि) लोकसभा एवं राज्यसभा में किस मकसद के लिए हैं।’’

जब यह बताया गया कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल मार्च में जनहित याचिका पर नोटिस जारी किये थे तब पीठ ने कहा कि यदि केंद्र ने जवाब दाखिल किया होगा तब वह मामले की सुनवाई करेगी।

उपाध्याय ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि खासकर म्यांमा एवं बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों के आगमन से न केवल सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकी ढांचा खतरे में आ गया है बल्कि सुरक्षा एवं राष्ट्रीय अखंडता को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।

भाषा राजकुमार मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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